रायपुर/मोरबी: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव ने भारत की सेरामिक्स इंडस्ट्री को बड़े संकट में डाल दिया है। वैश्विक उथल-पुथल के कारण कमर्शियल गैस की सप्लाई बाधित होने से देश की ‘सेरामिक्स कैपिटल’ कहे जाने वाले गुजरात के मोरबी में टाइल्स का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
मोरबी में उत्पादन ठप, सप्लाई का टोटा
गैस सप्लाई में कमी के कारण पिछले दो महीनों से मोरबी में 500 से अधिक सेरामिक्स प्लांट बंद हो गए हैं। टाइल्स बनाने वाली भट्टियों को चलाने के लिए लगातार गैस की आवश्यकता होती है और सरकारी निर्देशों के कारण अब ये प्लांट बिजली के बजाय पूरी तरह गैस पर निर्भर हैं। सप्लाई रुकने से उत्पादन बंद हो गया है, जिसका सीधा असर देशव्यापी वितरण पर पड़ा है।
छत्तीसगढ़ में 25 फीसदी तक बढ़ी कीमतें
प्रदेश के बाजारों में टाइल्स की आवक अब न के बराबर रह गई है। कारोबारियों के अनुसार, मोरबी से सप्लाई कम होने के कारण पुराना स्टॉक ही बेचा जा रहा है, जिससे मनपसंद डिजाइन मिलना मुश्किल हो गया है। आवक घटने और लागत बढ़ने के कारण टाइल्स की कीमतों में 20 से 25 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। अधिकांश टाइल्स के दाम 5 से 7 रुपये प्रति फीट तक बढ़ गए हैं, साथ ही अब 5 फीसदी अतिरिक्त फ्यूल शुल्क भी वसूला जा रहा है।
हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट्स पर ब्रेक
टाइल्स की कमी का सबसे बड़ा असर रियल एस्टेट और सरकारी निर्माण कार्यों पर पड़ा है। ‘बिल्डर एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (छत्तीसगढ़ शाखा) के रूपेश सिंघल के मुताबिक, प्रदेश में हजारों करोड़ रुपये के सरकारी काम चल रहे हैं, जो टाइल्स न मिलने के कारण अधर में लटक गए हैं। निर्माण कार्यों की गति रुकने से परियोजनाओं की लागत और समय दोनों बढ़ने की आशंका है।
संकट में 40,000 करोड़ का टर्नओवर
भारत की सेरामिक्स इंडस्ट्री का सालाना टर्नओवर 40,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जिसमें मोरबी का सबसे बड़ा योगदान है। यहाँ से 150 से अधिक देशों को निर्यात किया जाता है। यदि गैस सप्लाई की स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो इस बड़े आर्थिक तंत्र को और भी गहरा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

