दक्षिण कोलकाता में निर्माणाधीन गोदाम का शेड अचानक भरभराकर गिर गया, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर और कर्मचारी मलबे में दब गए। हादसे में अब तक 5 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 50 से 55 लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत-बचाव कार्य तुरंत शुरू कर दिया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के समय गोदाम में कंक्रीट ढलाई का काम चल रहा था। मजदूर अपने नियमित कार्य में लगे हुए थे, तभी अचानक शेड का एक बड़ा हिस्सा ढह गया। देखते ही देखते पूरा ढांचा गिर पड़ा और कई लोग उसके नीचे दब गए। हादसा इतना अचानक हुआ कि अधिकांश लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और आपदा प्रबंधन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। राहत और बचाव कार्य के लिए अतिरिक्त संसाधन भी लगाए गए। अब तक 13 लोगों को मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। इनमें कई लोग घायल हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।
बचाव दलों को मलबे में दबे लोगों तक पहुंचने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। गोदाम के ढांचे में बड़ी मात्रा में लोहे की रॉड, सीमेंट और निर्माण सामग्री मौजूद है, जिसके कारण राहत कार्य धीमा हो रहा है। मलबे को हटाने के लिए भारी क्रेन और अन्य मशीनों की मदद ली जा रही है। वहीं, गैस कटर के जरिए लोहे की छड़ों को काटकर रास्ता बनाया जा रहा है ताकि अंदर फंसे लोगों तक जल्द पहुंचा जा सके।

राहतकर्मियों के मुताबिक, मलबे के भीतर से कई लोगों की आवाजें और मदद की पुकार सुनाई दे रही हैं। इसी वजह से बचाव दल पूरी सावधानी के साथ काम कर रहे हैं, ताकि मलबा हटाने के दौरान किसी फंसे हुए व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता अधिक से अधिक लोगों को जीवित बाहर निकालने की है।
स्थानीय लोगों ने भी राहत कार्य में प्रशासन का सहयोग किया। कई लोग घटनास्थल पर जुटे रहे और एंबुलेंस तथा राहत दलों की मदद करते दिखाई दिए। हादसे की खबर फैलते ही पीड़ित परिवारों के लोग भी मौके पर पहुंच गए, जिनमें अपने परिजनों की तलाश को लेकर चिंता और बेचैनी साफ दिखाई दी।
प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, हादसा निर्माण कार्य के दौरान हुआ है, लेकिन शेड गिरने की वास्तविक वजह का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि यदि निर्माण में लापरवाही या सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरा ध्यान राहत और बचाव कार्य पर केंद्रित है। प्रशासन का दावा है कि जब तक मलबे में फंसे सभी लोगों को बाहर नहीं निकाल लिया जाता, तब तक अभियान लगातार जारी रहेगा। इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

