नई दिल्ली: देश भर में नीट-यूजी (NEET-UG) परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक को लेकर जारी उग्र छात्र आंदोलनों के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। भारी राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेज दिया है और साथ ही देश के युवाओं के नाम एक भावुक पत्र भी जारी किया है।
पिछले कई दिनों से दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में मेडिकल छात्रों और विपक्षी दलों द्वारा लगातार प्रदर्शन किए जा रहे थे। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग जोर पकड़ रही थी।
इस्तीफे से जुड़ी प्रमुख बातें:
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प्रधानमंत्री को सौंपा त्यागपत्र: धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि पिछले 10 दिनों के घटनाक्रम से उनका मन अत्यंत व्यथित और दुखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उनके लिए किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है, बल्कि देश की युवा शक्ति ही भारत की असली ताकत है।
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राष्ट्र की अखंडता सर्वोपरि: उन्होंने अपने पत्र में कहा कि जंतर-मंतर और देश भर में जो स्थिति बनी है, उसका कोई राष्ट्र-विरोधी तत्व अनुचित लाभ न उठा सके और देश की एकता बनी रहे, इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह कदम उठाया है।
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CBI जांच और परीक्षा प्रणाली में बदलाव: उन्होंने बताया कि नीट-यूजी परीक्षा में पाई गई अनियमितताओं पर तुरंत संज्ञान लेते हुए मामला सीबीआई (CBI) को सौंपा गया, प्रभावित परीक्षा को रद्द कर पुनः परीक्षा कराई गई। इसके अलावा, अगले वर्ष से इस परीक्षा को सीबीटी (CBT – कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट) मोड में आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
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छात्रों के भविष्य की सुरक्षा: पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता 20 लाख से अधिक मेधावी छात्रों के भविष्य की रक्षा करना रही है, ताकि किसी भी छात्र के साथ परीक्षा माफिया के कारण अन्याय न हो।
मेडिकल छात्रों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार की चौतरफा जवाबदेही तय करने की दिशा में इस इस्तीफे को एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक कदम माना जा रहा है। ताज़ा खबरों और अपडेट्स के लिए हमें Facebook और Instagram पर फॉलो करें।


