**जशपुरनगर | 20 मई 2026**
आस्था, सांप्रदायिक सौहार्द और रूहानी सूफी संगीत के गवाह माने जाने वाले छत्तीसगढ़ के जशपुर नगर में एक बार फिर अकीदतमंदों का बड़ा हुजूम जुटने जा रहा है। यहाँ के मशहूर सूफी संत हजरत मलंग शाह बाबा (रहमतुल्लाह अलैह) का दो दिवसीय सालाना उर्स शरीफ आगामी 1 जून (सोमवार) और 2 जून (मंगलवार) 2026 को पूरी अकीदत और अदब के साथ मनाया जाएगा। इस भव्य धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन को लेकर क्षेत्र के सूफी प्रेमियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। मुजावर इस्माईल अंसारी और उर्स कमेटी ने इस बड़े आयोजन के लिए सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।
मन्नत पूरी होने का पवित्र केंद्र है बाबा का दरबार
हजरत मलंग शाह बाबा का दरबार जशपुर और आसपास के अंचलों में हिंदू-मुस्लिम एकता और गहरी आस्था का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है। ऐसी सुदृढ़ मान्यता है कि बाबा के आस्ताने पर जो भी मुराद लेकर आता है, बाबा के वसीले से उसकी झोली कभी खाली नहीं रहती। यही वजह है कि हर साल उर्स के मौके पर न केवल मुस्लिम समाज, बल्कि हर वर्ग और धर्म के लोग बाबा की मजार पर चादरपोशी करने और मन्नतें मांगने पहुँचते हैं। इस वर्ष भी उर्स के मद्देनजर बाबा के दर को बेहद खूबसूरत ढंग से सजाया जा रहा है, जहाँ अकीदतमंदों की सहूलियत के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
अजमेर शरीफ से जुड़ा है बाबा के आगमन का इतिहास
इतिहास के झरोखों से पता चलता है कि हजरत बाबा मलंग शाह अजमेर शरीफ में ख्वाजा गरीब नवाज की खिदमत करने के बाद जशपुर पहुंचे थे। मान्यता के अनुसार, जशपुर के पूर्व राजा विशुन देव सिंह के शासनकाल के समय बाबा अपने हाथियों और शागिर्दों के साथ यहाँ तशरीफ़ लाए थे। राजा स्वयं अपनी कुछ राजसी और व्यक्तिगत समस्याएं लेकर बाबा के पास पहुंचे थे, और जब उन समस्याओं का चमत्कारी रूप से समाधान हो गया, तो राजा स्वयं बाबा के मुरीद बन गए। तब से आज तक यह दरबार अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहाँ छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी राज्यों जैसे ओडिशा और झारखंड से भी भारी संख्या में अकीदतमंद शामिल होते हैं।
दो दिवसीय उर्स शरीफ का पूरा कार्यक्रम
उर्स कमेटी द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, उर्स के पहले दिन यानी 1 जून 2026 (सोमवार) को सुबह 10 बजे से मज़ारे अक़्दस में कुरआन ख्वानी की जाएगी। इसके बाद नमाज़े ज़ोहर के बाद संदल व गुस्ल की रस्म अदा होगी। शाम को नमाज़े असर के बाद ठीक 5 बजे बाबा के आस्ताने पर गाजे-बाजे के साथ पारंपरिक चादर पोशी की जाएगी।
वहीं उर्स के दूसरे दिन यानी 2 जून 2026 (मंगलवार) को सुबह 10 बजे से पुनः कुरआन ख्वानी व फातेहा ख्वानी का सिलसिला चलेगा। इस दौरान विशेष रूप से देश और इलाके की तरक्की, खुशहाली तथा अमन-चैन के लिए सामूहिक रूप से खास दुआएं मांगी जाएंगी।
गुलनाज़ साबरी और गुलाम हबीब के बीच कव्वाली का महामुकाबला
इस उर्स शरीफ का मुख्य आकर्षण दोनों दिन रात 9 बजे से शुरू होने वाली ‘महफिले कव्वाली’ होगी। इस बार श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने के लिए देश के दो बेहद नामचीन फनकार जशपुर की जमीं पर आ रहे हैं। इनमें आगरा की मशहूर कव्वाला और वीडियो-ऑडियो सिंगर गुलनाज़ साबरी तथा गोरखपुर के विख्यात कव्वाल गुलाम हबीब शामिल हैं। दोनों ही कलाकारों के बीच सूफियाना कलाम और जवाबी कव्वाली का ऐसा जोरदार मुकाबला होगा जो रातभर दर्शकों को बांधे रखेगा।
आम जनता को पुरजोर इस्तकबाल
उर्स कमेटी के मुख्य सेवादारों—मो. महबूब अंसारी, मो. सरफराज आलम, मो. रफीक, मो. इमरान आलम और मो. नईम फैशन ने संयुक्त रूप से क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमियों और आम जनता को इस रूहानी जलसे में शामिल होने का पुरजोर इस्तकबाल यानी आमंत्रण किया है।
जशपुर नगर छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख जिला मुख्यालय है जो सड़क मार्ग द्वारा राज्य के अन्य प्रमुख शहरों और पड़ोसी राज्यों से बेहतर तरीके से जुड़ा हुआ है, जिससे यहाँ आने वाले जायरीनों को सुगम परिवहन व्यवस्था मिल सकेगी।

