**रायपुर, 22 मई 2026।**
लोक निर्माण विभाग (PWD) के ठेकेदारों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर है। विभाग ने निर्माण कार्यों में तेजी लाने और ठेकेदारों को वित्तीय दिक्कतों से बचाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब ठेकेदारों को अपने भुगतान (पेमेंट) के लिए महीनों इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि उनके द्वारा किए गए कार्यों के आधार पर हर महीने भुगतान (Monthly Payment) सुनिश्चित किया जाएगा।इसके साथ ही, विभाग ने लालफीताशाही और दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी को खत्म करते हुए फंड आवंटन की प्रक्रिया को भी बदल दिया है।
एक-एक बिल का झंझट खत्म, कार्यपालन अभियंताओं को मिलेगा एकमुश्त फंड
लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने ठेकेदारों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख अभियंता (ENC) को कड़े निर्देश जारी किए हैं। नए नियम के तहत, अब एक-एक देयक (बिल) के स्थान पर संबंधित कार्यपालन अभियंताओं (EE) को **हर तीन महीने के भुगतान के लिए जरूरी राशि एडवांस में आबंटित** कर दी जाएगी। इस व्यवस्था से ठेकेदारों के बिल स्थानीय स्तर पर ही तुरंत पास हो सकेंगे और काम के बीच में फंड की कमी नहीं होगी।
मुख्यालय में रहेंगे अधिकारी, तुरंत दूर होंगी तकनीकी बाधाएं
ठेकेदारों की सहूलियत और काम की गति को प्रभावित होने से बचाने के लिए विभाग ने अनुविभागीय अधिकारियों (SDO) से लेकर प्रमुख अभियंता (ENC) तक के सभी अधिकारियों को अनिवार्य रूप से **मुख्यालय में रहने के निर्देश** दिए हैं। अधिकारियों की साइट और मुख्यालय पर मौजूदगी से ठेकेदारों को तकनीकी स्वीकृतियों, साइट संबंधी विवादों और प्रशासनिक अड़चनों का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे निर्माण कार्य बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सकेंगे।
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पेमेंट समय पर, तो काम में भी चाहिए तेजी और गुणवत्ता‘
विभाग ने जहाँ एक तरफ ठेकेदारों को समय पर भुगतान की गारंटी देकर बड़ी राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ काम की रफ्तार और गुणवत्ता को लेकर अपनी उम्मीदें भी साफ कर दी हैं। सचिव ने स्पष्ट किया है कि जिन कार्यों को प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है, उन्हें **तत्काल प्रारंभ** करना होगा। समयबद्धता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग कार्यों की गहन मॉनिटरिंग (निगरानी) भी करेगा।
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ठेकेदारों के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
अक्सर फंड रुकने या अधिकारियों की अनुपलब्धता के कारण ठेकेदारों का वर्किंग कैपिटल ब्लॉक हो जाता है, जिससे निर्माण कार्य कछुआ गति से चलते हैं। विभाग के इस कदम से न केवल ठेकेदारों को समय पर पैसा मिलेगा, बल्कि सरकारी तंत्र की लेम-डक कार्यप्रणाली से भी मुक्ति मिलेगी।

