चंडीगढ़: 8वें केंद्रीय वेतन आयोग ने सैलरी, अलाउंस और पेंशन संशोधन को लेकर अपनी जमीनी परामर्श प्रक्रिया तेज कर दी है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में आयोग की टीम ने चंडीगढ़ में तीन दिवसीय महत्वपूर्ण बैठकें शुरू की हैं। शुक्रवार तक चलने वाले इस दौरे में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ के प्रशासनिक प्रतिनिधियों के साथ-साथ रेलवे, रक्षा और असैन्य कर्मचारी संगठनों से सीधा संवाद कर उनके सुझाव और आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। 3 नवंबर 2025 को गठित इस आयोग को 18 महीने के भीतर अपनी सिफारिशें केंद्र सरकार को सौंपनी हैं, जो देश के 1 करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनर्स का भविष्य तय करेंगी।
इस त्रिपक्षीय बैठक का सीधा असर लगभग 50 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 65 लाख पेंशनभोगियों पर पड़ेगा। कर्मचारी यूनियनों ने आयोग के सामने चार मुख्य वित्तीय मांगें मजबूती से रखी हैं:
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फिटमेंट फैक्टर: नए वेतनमान में बेसिक सैलरी को बढ़ाने के लिए फिटमेंट फैक्टर में सम्मानजनक बढ़ोतरी की मांग।
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महंगाई भत्ता (DA): डीए की समयबद्ध समीक्षा और एक तय सीमा के बाद इसे सीधे मूल वेतन (बेसिक पे) में मर्ज करने का प्रस्ताव। मेडिकल स्टोर्स पर CCTV लगाना अनिवार्य करने की तैयारी, बिना पर्चे दवाओं की बिक्री पर कसेगा शिकंजा
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HRA व अन्य भत्ते: महानगरों और बड़े शहरों में बढ़ते खर्च को देखते हुए मकान किराया, ट्रांसपोर्ट और स्पेशल अलाउंस को वर्तमान महंगाई दर से जोड़ने की मांग।
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पेंशनर्स की सुरक्षा: बेहतर मेडिकल सुविधाएं, कैशलेस इलाज और पारिवारिक पेंशन नियमों को अधिक सुरक्षित बनाने पर जोर।
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कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वेतन और सेवा शर्तों को प्रतिस्पर्धी बनाने से न केवल मौजूदा कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि नई भर्तियों में भी मदद मिलेगी। आयोग इन सभी सुझावों के आधार पर अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेजेगा।























