छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों की दादागिरी खत्म! फीस और किताबों की मनमानी पर कसेगा शिकंजा
दुर्ग। स्कूल शिक्षा विभाग में भी वर्षों से चल रहे ‘अटैचमेंट’ यानी संलग्नीकरण के खेल पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। दुर्ग जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए जिले में सभी स्तर के शिक्षकों के संलग्नीकरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। इस संबंध में जिला कार्यालय द्वारा एक कड़ा आधिकारिक आदेश जारी किया गया है, जिससे विभाग के रसूखदार कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है।
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जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, जिले के प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी शालाओं में अध्यापन व्यवस्था के नाम पर जितने भी शिक्षक अन्य जगहों पर अटैच थे, उनका संलग्नीकरण समाप्त कर दिया गया है। आदेश में सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने स्तर पर किए गए सभी संलग्नीकरणों को तुरंत निरस्त करें। साथ ही संबंधित शिक्षकों को उनकी मूल संस्था के लिए तत्काल कार्यमुक्त किया जाए और आगामी पच्चीस मई तक इस आदेश का पालन प्रतिवेदन जिला कार्यालय में अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। अधिकारियों को यह प्रमाण पत्र भी देना होगा कि अब उनके अधीन कोई भी शिक्षक अटैच नहीं है।
विभाग ने यह भी साफ कर दिया है कि इस अल्टीमेटम के बाद भी यदि कोई शिक्षक अपनी मूल शाला की जगह कहीं और संलग्न पाया गया, तो इसके लिए संबंधित शिक्षक के साथ-साथ वहां के संस्था प्रमुख को भी जिम्मेदार माना जाएगा। ऐसे मामलों में आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए प्रस्ताव उच्च कार्यालय को प्रेषित किया जाएगा।
शिक्षा जगत में इस फैसले की सराहना हो रही है, लेकिन इसके साथ ही यह मांग भी उठने लगी है कि अटैचमेंट का यह खेल सिर्फ शिक्षकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। स्कूलों से बड़ी संख्या में लिपिक भी अपनी मूल जगह छोड़कर शिक्षा विभाग के बड़े कार्यालयों में अटैच हैं, जिससे स्कूलों का प्रशासनिक काम प्रभावित हो रहा है। इसी तरह कई व्याख्याता और प्राचार्य कैडर के रसूखदार कर्मचारी स्कूलों में जाकर पढ़ाने के डर से जिला या विकासखंड कार्यालयों में अटैचमेंट कराकर बैठे हैं। ऐसे अधिकारियों को भी चिन्हित कर मूल पदांकन संस्था के लिए तत्काल रिलीव किया जाना चाहिए ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई की व्यवस्था सुधर सके।
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