नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने संगठित क्षेत्र के करोड़ों कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत आने वाली अनिवार्य वेतन सीमा (Wage Ceiling) को बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई, जिसके तहत अब वेतन की सीमा को ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह कर दिया गया है। इस बदलाव से देश के 51 लाख से अधिक नए कर्मचारियों को सीधे तौर पर सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलेगा।
12 साल बाद हुआ ऐतिहासिक बदलाव
इससे पहले EPFO के लिए अनिवार्य वेतन सीमा सितंबर 2014 में ₹6,500 से बढ़ाकर ₹15,000 की गई थी। पिछले करीब 12 वर्षों से इस सीमा में कोई संशोधन नहीं किया गया था। सरकार ने देश में लगातार बढ़ते वेतन स्तर, महँगाई और औपचारिक रोजगार (Formal Employment) के विस्तार को ध्यान में रखते हुए यह बड़ा कदम उठाया है।
कर्मचारियों को मिलेंगे ये प्रमुख लाभ
वेतन सीमा ₹25,000 होने से अब इस वेतन वर्ग के दायरे में आने वाले कर्मचारी अनिवार्य रूप से सामाजिक सुरक्षा के घेरे में आ जाएंगे। इससे उन्हें निम्नलिखित तीन प्रमुख योजनाएं मिलेंगी:
- भविष्य निधि (EPF): कर्मचारियों के लॉन्ग-टर्म सेविंग्स और प्रोविडेंट फंड की सुरक्षा मजबूत होगी।
- पेंशन योजना (EPS): कर्मचारियों को कर्मचारी पेंशन योजना के तहत रिटायरमेंट के बाद पेंशन का लाभ मिलेगा।
- बीमा सुरक्षा (EDLI): कर्मचारियों को एम्प्लॉइज डिपॉजिट लिंक्ड इंश्योरेंस स्कीम के तहत बीमा सुरक्षा कवच प्राप्त होगा।
सरकार पर पड़ेगा आर्थिक भार
इस बदलाव के मद्देनजर सरकार पर वित्तीय प्रभाव भी पड़ेगा। सरकारी अनुमान के अनुसार, इस बढ़े हुए दायरे और अतिरिक्त पेंशन योगदान के कारण सरकार को हर साल लगभग ₹11,339 करोड़ का खर्च वहन करना होगा (जो कि मौजूदा करीब ₹10,250 करोड़ की वार्षिक बजटीय सहायता से अधिक है)। अगले 5 वर्षों में इस पर कुल लगभग ₹56,696 करोड़ खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के इस कदम से देश में औपचारिक क्षेत्र के रोजगार को बढ़ावा मिलेगा और कर्मचारियों का भविष्य अधिक सुरक्षित व सुदृढ़ हो सकेगा। श्रम मंत्रालय और EPFO द्वारा जल्द ही इसके औपचारिक क्रियान्वयन और नियमों की विस्तृत अधिसूचना जारी की जाएगी।























