नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश को एक खास सौगात देते हुए ‘यूएमएमआईडी’ (उम्मीद) नाम का एक नया कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित किया है। यह कार्यक्रम उन परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आया है, जिनके घरों में बच्चे या सदस्य माता-पिता से मिलने वाली आनुवंशिक (जेनेटिक) और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित हैं। नई दिल्ली के पृथ्वी भवन में आयोजित एक खास कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने इस नेटवर्क के साथ-साथ एक नया डैशबोर्ड भी लॉन्च किया, जिससे देश भर में इन बीमारियों की जांच, डॉक्टर की सलाह और इलाज की निगरानी आसान हो सकेगी।
इस मौके पर डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चिकित्सा का पूरा भविष्य अब जीन और जीनोम आधारित इलाज पर टिका है। आने वाले समय में हर मरीज की जेनेटिक बनावट को देखकर उसका व्यक्तिगत इलाज किया जाएगा। उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि ऐसी बीमारियां सालों से उपेक्षित रहीं क्योंकि इनकी जांच बहुत मुश्किल थी और दवाइयां इतनी महंगी थीं कि आम परिवारों की पहुंच से बाहर थीं। इसके इलाज के लिए मरीज सालों-साल एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहते हैं। ‘उम्मीद’ कार्यक्रम इसी भटकाव को दूर करने और इलाज को हर नागरिक के लिए सस्ता और सुलभ बनाने की एक बड़ी राष्ट्रीय कोशिश है।
जैव प्रौद्योगिकी (बायोटेक्नोलॉजी) विभाग द्वारा शुरू किए गए इस कार्यक्रम की तारीफ करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि इस अभियान से अब तक लगभग तीन लाख लोगों को सीधा फायदा मिल चुका है। देश के पिछड़े और वंचित इलाकों में करीब तीस नए डायग्नोस्टिक (जांच) केंद्र खोले गए हैं, जिससे बड़े शहरों के बाहर भी आम लोगों को जीनोमिक स्वास्थ्य सेवा मिल पा रही है। इस कार्यक्रम के जरिए नवजात शिशुओं की शुरुआती जांच, जेनेटिक काउंसलिंग और डॉक्टरों को खास ट्रेनिंग दी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से मिले अनुभव का फायदा आने वाले समय में कैंसर, डायबिटीज और दिल की बीमारियों के सटीक इलाज में भी मिलेगा।

