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बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन (Family Pension) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि पहली पत्नी के जीवित रहते किया गया दूसरा विवाह भले ही हिंदू विवाह अधिनियम के तहत अवैध हो, लेकिन सिर्फ इस आधार पर दूसरी पत्नी को पेंशन के अधिकार से स्वतः वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति बिभू दत्त गुरु की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1976 एक कल्याणकारी प्रावधान है, जिसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है। इसलिए इसकी व्याख्या तकनीकी रूप से नहीं बल्कि उदारतापूर्वक की जानी चाहिए।
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क्या है पूरा मामला?
यह मामला जगदलपुर के गुंडाधुर कृषि अनुसंधान केंद्र में सहायक लेखाकार रहे दिवंगत कर्मचारी मनोकांत पांडेय से जुड़ा है:मनोकांत पांडेय ने अपनी पहली पत्नी पुष्पलता उपाध्याय के रहते हुए अन्नपूर्णा पांडेय से दूसरा विवाह किया था, जिनसे उनकी तीन बेटियां हैं।
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11 सितंबर 2007 को मनोकांत पांडेय का निधन हो गया। इसके बाद दोनों पत्नियों के बीच सिविल कोर्ट में एक समझौता हुआ। समझौते के तहत पहली पत्नी को फैमिली पेंशन और दूसरी पत्नी (अन्नपूर्णा) को भविष्य निधि (PF) की राशि तथा अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार मिला।इसी समझौते के आधार पर विभाग ने अन्नपूर्णा पांडेय को 24 जून 2010 को सहायक ग्रेड-1 के पद पर अनुकंपा नियुक्ति दे दी।
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विवाद की शुरुआत
31 अक्टूबर 2020 को पहली पत्नी पुष्पलता उपाध्याय का निधन हो गया। चूंकि उनका कोई कानूनी वारिस या संतान नहीं थी, इसलिए दूसरी पत्नी अन्नपूर्णा पांडेय ने पारिवारिक पेंशन के लिए दावा पेश किया। लेकिन इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 4 सितंबर 2021 को उनका आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया कि दूसरा विवाह शून्य (अवैध) होने के कारण वे वैध पत्नी नहीं हैं। इसके बाद यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा।
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हाई कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां और आधार
हाई कोर्ट ने विश्वविद्यालय के आदेश को निरस्त करते हुए दूसरी पत्नी के पक्ष में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
पेंशन नियम पर्सनल लॉ से अलग:
अदालत ने साफ किया कि पेंशन का अधिकार उत्तराधिकार कानून या हिंदू विवाह अधिनियम से नहीं, बल्कि सेवा नियमों से तय होता है। पेंशन नियम 47(7) में स्पष्ट रूप से एक से अधिक विधवाओं को पारिवारिक पेंशन देने का प्रावधान मौजूद है।
मद्रास हाई कोर्ट का हवाला:
कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के एस. कामाक्षी प्रकरण का उदाहरण देते हुए कहा कि पेंशन सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा है, इसलिए इसमें कल्याणकारी दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।
दोहरा मापदंड अनुचित
हाई कोर्ट ने कहा कि विभाग खुद अन्नपूर्णा पांडेय को दिवंगत कर्मचारी की पत्नी मानकर पहले ही अनुकंपा नियुक्ति दे चुका है। ऐसे में पहली पत्नी की मृत्यु के बाद, जब कोई अन्य दावेदार भी नहीं बचा है, दूसरी पत्नी को पेंशन देने से इनकार करना पूरी तरह अनुचित और कानूनी रूप से गलत है।
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कोर्ट का अंतिम आदेश
12 सप्ताह में भुगतान का निर्देश: छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय और संबंधित विभाग को आदेश दिया है कि वे फैसले की प्रमाणित प्रति मिलने के 12 सप्ताह (3 महीने) के भीतर अन्नपूर्णा पांडेय को पारिवारिक पेंशन स्वीकृत करें। साथ ही, उन्हें अब तक का समस्त बकाया (एरियर) और अन्य परिणामी लाभों का भुगतान भी सुनिश्चित किया जाए।

