भारत में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस (Antibiotic Resistance) तेजी से गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनता जा रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक लेने की आदत न सिर्फ इलाज को मुश्किल बना रही है, बल्कि मरीजों का अस्पताल का खर्च भी कई गुना बढ़ा सकती है। कुछ मामलों में सामान्य इंफेक्शन भी गंभीर होकर जानलेवा साबित हो सकता है।
बिना सलाह एंटीबायोटिक लेना पड़ सकता है भारी
बुखार, जुकाम, सिरदर्द या पेट की समस्या होने पर कई लोग सीधे मेडिकल स्टोर से दवा लेकर इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। खासतौर पर एंटीबायोटिक का बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है। जब बैक्टीरिया किसी एंटीबायोटिक के खिलाफ प्रतिरोधी हो जाते हैं और दवा उन पर असर नहीं करती, तो इसे एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में सामान्य दवाओं से संक्रमण नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है और डॉक्टरों को ज्यादा प्रभावी एंटीबायोटिक का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।

20 रुपये की दवा पड़ सकती है 60-70 रुपये की
डॉक्टरों के अनुसार, कई मरीजों में सामान्य एंटीबायोटिक अब प्रभावी नहीं रह गई हैं। ऐसे मामलों में दूसरी या अधिक प्रभावी एंटीबायोटिक की जरूरत पड़ सकती है, जिसकी कीमत सामान्य दवा से कई गुना अधिक हो सकती है। यानी जिस संक्रमण का इलाज करीब 20 रुपये की दवा से हो सकता था, उसमें दवा के असर न करने पर मरीज को 60-70 रुपये या उससे अधिक खर्च करना पड़ सकता है। गंभीर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत भी पड़ सकती है, जिससे कुल इलाज का खर्च काफी बढ़ जाता है।
पांचवीं पीढ़ी की एंटीबायोटिक भी हो रही बेअसर
डॉक्टरों के अनुसार एंटीबायोटिक्स को उनकी प्रभावशीलता और बैक्टीरिया के खिलाफ काम करने के आधार पर अलग-अलग पीढ़ियों में बांटा जाता है। उदाहरण के तौर पर सेफालेक्सीन पहली पीढ़ी की एंटीबायोटिक है, जबकि सेफ्टारोलिन पांचवीं पीढ़ी की दवा है। चिंता की बात यह है कि कुछ मामलों में ज्यादा प्रभावी मानी जाने वाली एंटीबायोटिक्स भी संक्रमण पर असर नहीं कर रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को नियंत्रित नहीं किया गया तो भविष्य में सामान्य बैक्टीरियल संक्रमण का इलाज भी बेहद मुश्किल हो सकता है।
ICMR की स्टडी में सामने आई चिंता
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) की स्टडी में भी भारत में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट बैक्टीरियल इंफेक्शन के बढ़ते खतरे को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 से 2025 के बीच करीब 1.6 लाख मरीजों के आंकड़ों का अध्ययन किया गया। रिसर्च The Lancet Regional Health – Southeast Asia में प्रकाशित हुई है।
एंटीबायोटिक से जुड़ी इन गलतियों से बचें
विशेषज्ञों की सलाह है कि एंटीबायोटिक का इस्तेमाल हमेशा डॉक्टर की सलाह से ही किया जाना चाहिए।
- बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न लें।
- डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवा और अवधि का पालन करें।
- तबीयत बेहतर लगने पर भी दवा अपने मन से बंद न करें।
- बची हुई पुरानी एंटीबायोटिक को दोबारा इस्तेमाल न करें।
- अपनी एंटीबायोटिक किसी दूसरे व्यक्ति को न दें।
- हर बुखार, जुकाम या वायरल बीमारी में एंटीबायोटिक जरूरी नहीं होती।























