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रायपुर:
छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता और प्राकृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। अपने अद्वितीय छद्मावरण (कैमूफ्लाज) और आकर्षक रंगों के लिए जानी जाने वाली ‘ऑरेंज ओकलीफ’ (Orange Oakleaf) को छत्तीसगढ़ की पहली राजकीय तितली घोषित किया गया है। राज्य वन्यजीव बोर्ड की उच्चस्तरीय बैठक में इसके आधिकारिक चयन पर मुहर लगा दी गई है।
इस तितली की सबसे अद्भुत विशेषता यह है कि पंख बंद करते ही यह किसी सूखे पत्ते जैसी दिखने लगती है, जबकि पंख फैलाते ही इसके भीतर के चमकीले नारंगी और गहरे नीले रंग सामने आ जाते हैं।
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ऑनलाइन जनमत संग्रह और विशेषज्ञों की पसंद बनी ऑरेंज ओकलीफ
राजकीय तितली के चयन के लिए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए 24 जुलाई से 31 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन वोटिंग कराई थी। गूगल फॉर्म के माध्यम से कराए गए इस जनमत संग्रह में आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और वन्यजीव प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
इस दौड़ में ऑरेंज ओकलीफ के अलावा ‘कॉमन बैंडेड पीकॉक’ और ‘स्पॉट स्वॉर्डटेल’ जैसी सुंदर प्रजातियां भी शामिल थीं, लेकिन जनता के जबरदस्त समर्थन और विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा के बाद ऑरेंज ओकलीफ को विजेता चुना गया।
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प्रकृति का बेजोड़ छद्मावरण: शिकारियों को देती है चकमा
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डेडलीफ के नाम से भी पहचान: ऑरेंज ओकलीफ को ‘इंडियन ओकलीफ’ या ‘डेडलीफ’ भी कहा जाता है। इसके पंखों की बाहरी बनावट, नसें और रंग हूबहू सूखे पत्ते जैसे होते हैं। जमीन या पेड़ों पर बैठते ही यह पत्तों के बीच पूरी तरह ओझल हो जाती है, जिससे शिकारी पक्षी इसे देख नहीं पाते।
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उड़ते ही बिखरते हैं चटख रंग: पंख खोलते ही इसके ऊपरी हिस्से का गहरा नीला और चमकीला नारंगी रंग इसे बेहद मनमोहक रूप देता है। खतरे का आभास होते ही यह तेजी से उड़कर पेड़ों के झुरमुट में छिप जाती है।
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खान-पान की अनूठी आदत: यह तितली केवल फूलों के पराग (रस) पर निर्भर नहीं रहती। यह सड़े-पके फलों, पेड़ों से निकलने वाले रस और गीली मिट्टी से खनिज लवण भी सोखती है, जिसे विज्ञान में ‘मड-पडलिंग’ (Mud-puddling) कहा जाता है।
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छत्तीसगढ़ में तितलियों की 201 प्रजातियां, कांगेर घाटी बना मुख्य ठिकाना
प्रदेश में बीते छह वर्षों के दौरान तितलियों पर किए गए गहन वैज्ञानिक शोध में कई नई प्रजातियों की पुष्टि हुई है। हाल ही में 19 नई प्रजातियों के जुड़ने से छत्तीसगढ़ में तितलियों की कुल आधिकारिक संख्या 182 से बढ़कर 201 पहुंच गई है।
बस्तर स्थित कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान तितलियों के प्रमुख और सबसे समृद्ध प्राकृतिक आवासों में से एक है। यहां ऑरेंज ओकलीफ के अलावा कॉमन जेम, ब्लू टाइगर और कॉमन मैप जैसी दुर्लभ प्रजातियां बड़ी संख्या में पाई जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑरेंज ओकलीफ को राजकीय तितली का दर्जा मिलने से प्रदेश में इको-टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा और जंगलों के संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता में वृद्धि होगी। New OTT Releases This Week: इस हफ्ते OTT पर आएंगी 11 फिल्में और वेब सीरीज, थ्रिलर से लेकर साइंस-फिक्शन तक मिलेगा भरपूर मनोरंजन


