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अंबिकापुर: फर्जी शपथपत्र देकर शासकीय सेवा में अनुकंपा नियुक्ति हासिल करने के गंभीर मामले में स्कूल शिक्षा विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। सरगुजा जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) डॉ. दिनेश कुमार झा ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बतौली में पदस्थ सहायक ग्रेड-3 (AG-3) सीमा कुशवाहा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। जांच में सामने आया है कि सीमा कुशवाहा ने अपने पति और भाई के पहले से सरकारी सेवा में होने की बात छिपाकर नौकरी हासिल की थी।
2017 में पिता के निधन के बाद मिली थी नियुक्ति स्व. चंद्रिका प्रसाद कुशवाहा की मृत्यु 23 फरवरी 2017 को हुई थी, जिसके बाद उनकी पुत्री सीमा कुशवाहा को 16 जून 2017 को अनुकंपा नियुक्ति दी गई थी। नियुक्ति की अर्हता पूरी करने के लिए सीमा ने 5 मई 2017 को एक शपथपत्र प्रस्तुत किया था। इसमें उन्होंने यह दावा किया था कि उनके परिवार में कोई भी सदस्य शासकीय अथवा अर्धशासकीय सेवा में कार्यरत नहीं है।
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शिकायत के बाद जांच में खुली पोल विकासखंड मैनपाट निवासी राजेश कुमार यादव ने 22 जुलाई को इस फर्जीवाड़े की शिकायत दर्ज कराई थी। डीईओ ने 7 अगस्त को एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया। समिति ने जब मूल अभिलेखों, आवेदन, शपथपत्र, पारिवारिक विवरण और सेवा पुस्तिकाओं की गहन पड़ताल की, तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई:
सीमा कुशवाहा के पति सुदामा कुशवाहा वर्ष 2010 से ही नियमित शासकीय सेवा में हैं , उनके सगे भाई राकेश कुशवाहा वर्ष 2013 से सरकारी नौकरी कर रहे हैं। इस महत्वपूर्ण तथ्य को पूरी तरह छिपाते हुए झूठा हलफनामा देकर अनुकंपा नियुक्ति का लाभ लिया गया।
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GAD के नियमों और सिविल सेवा आचरण का खुला उल्लंघन छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के नियमों के अनुसार, अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता केवल तभी बनती है जब परिवार का कोई भी अन्य सदस्य शासकीय सेवा में न हो। डीईओ डॉ. दिनेश कुमार झा ने आदेश में उल्लेख किया है कि तथ्य छिपाकर झूठा शपथपत्र देना छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों का खुला उल्लंघन और गंभीर कदाचार है। इसी के तहत कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
अंबिकापुर तय हुआ मुख्यालय, जारी होगी चार्जशीट निलंबन आदेश के तहत सीमा कुशवाहा का मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय अंबिकापुर निर्धारित किया गया है, साथ ही बिना सक्षम अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग के अनुसार:
यह निलंबन अंतिम दंड नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच के लिए अंतरिम प्रशासनिक उपाय है नियमानुसार उनके खिलाफ नियमित विभागीय जांच (DE) शुरू की जाएगी और पृथक से आरोप-पत्र (चार्जशीट) जारी किया जाएगा। विभागीय जांच का निष्कर्ष आने के बाद ही उनकी अनुकंपा नियुक्ति की वैधानिकता और बर्खास्तगी पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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