रायपुर:
छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से शुरू होने जा रही समर्थन मूल्य पर धान खरीदी से ठीक पहले शासन और आंदोलनरत पटवारियों के बीच टकराव चरम पर पहुंच गया है। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर 13 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे पटवारियों का आंदोलन गुरुवार को 24वें दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलन के कारण गिरदावरी, रकबा सत्यापन, किसान पंजीयन और सामान्य राजस्व कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। इस प्रशासनिक गतिरोध को खत्म करने के लिए राज्य सरकार अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू करने के विकल्प पर विचार कर रही है, हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
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राजस्व कामकाज को पटरी पर लाने के लिए प्रशासन की ओर से दंडात्मक कार्रवाइयां लगातार तेज की जा रही हैं। राजस्व पटवारी संघ के प्रांतीय पदाधिकारी भागवत कश्यप को निलंबित किए जाने के साथ ही प्रदेशभर में बड़ी संख्या में पटवारियों को ‘काम पर लौटो’ के कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं। राजधानी रायपुर के तूता धरनास्थल से हटाए जाने के बाद आंदोलनकारियों ने अब मठपुरैना स्थित हनुमान मंदिर परिसर को अपना नया केंद्र बनाया है। गुरुवार को संघ के प्रांतीय पदाधिकारियों नीरज प्रताप सिंह और दीपक तिवारी के नेतृत्व में हड़ताली पटवारियों ने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ कर सरकार को सद्बुद्धि देने की प्रार्थना की और निलंबन-नोटिस की कार्रवाई पर कड़ा रोष जताया।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किसानों और आम जनता के व्यापक हितों का हवाला देते हुए हड़ताली कर्मचारियों से तुरंत काम पर लौटने की अपील की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में संवाद के रास्ते खुले हैं, लेकिन धान उपार्जन की दहलीज पर किसानों को असुविधा में डालना उचित नहीं है। साथ ही, हड़ताली पटवारियों का अतिरिक्त प्रभार लेने से इनकार करने वाले राजस्व निरीक्षक (RI) संघ के फैसले का भी स्वागत किया गया है।
पटवारी संघ का स्पष्ट कहना है कि वेतन विसंगति दूर करने, पदोन्नति के समुचित अवसर मुहैया कराने और खासकर ‘पीवी ऐप’ के जरिए फसल सत्यापन में आ रही जमीनी व तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान निकाले बिना काम पर लौटना संभव नहीं है। हड़ताल के 24 दिन बीत जाने के कारण जमीनों के नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और छात्र-छात्राओं के आय-जाति-निवास प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्य पूरी तरह लंबित हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 15 नवंबर से पहले सरकार बातचीत से हल निकालती है या एस्मा लागू कर कोई सख्त प्रशासनिक कदम उठाती है।


