रायपुर/नई दिल्ली, 2 नवंबर 2026। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ तेजी से शक्तिशाली होकर भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील हो गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, तूफान आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट की ओर बढ़ रहा है। इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका है। वहीं ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और मध्य प्रदेश के मौसम पर भी इसके प्रभाव को लेकर निगरानी रखी जा रही है।
मौसम विभाग के बुलेटिन के अनुसार, तूफान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के साथ तट पार कर सकता है। हवा के झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने की आशंका है।
चार राज्यों में संभावित मौसमी असर
छत्तीसगढ़: 3 और 4 नवंबर को बढ़ सकती है बारिश
छत्तीसगढ़ में चक्रवात से जुड़ी मौसमी गतिविधियों के कारण बारिश की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 2 नवंबर को गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है। 3 और 4 नवंबर को कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की आशंका है। इसके बाद 5 से 7 नवंबर के बीच भी वर्षा का एक और दौर देखने को मिल सकता है। 
ओडिशा: भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी
ओडिशा में 2 से 4 नवंबर के बीच अनेक स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। 2 नवंबर को कुछ स्थानों पर भारी और 3-4 नवंबर को दक्षिणी ओडिशा के कुछ इलाकों में बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं और गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है।
झारखंड: हल्की से मध्यम बारिश के आसार
झारखंड में 1 से 4 नवंबर के बीच कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने का पूर्वानुमान है। हालांकि उपलब्ध पूर्वानुमान में राज्य के लिए आंध्र प्रदेश और ओडिशा जैसी व्यापक चक्रवाती चेतावनी नहीं बताई गई है। स्थानीय स्तर पर बादल, गरज-चमक और मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
मध्य प्रदेश: पूर्वी और अन्य हिस्सों में बदल सकता है मौसम
मध्य प्रदेश में 5 नवंबर तक कुछ स्थानों पर छिटपुट बारिश की संभावना जताई गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में गरज-चमक की गतिविधियां हो सकती हैं। पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर बारिश की संभावना है। हालांकि राज्य के लिए भीषण चक्रवाती तूफान जैसी सीधी चेतावनी नहीं है।
आंध्र प्रदेश में कब और कहां टकराएगा तूफान?
आईएमडी के 2 नवंबर सुबह 5 बजे जारी राष्ट्रीय बुलेटिन के अनुसार, चक्रवात ‘मुरासु’ सुबह 2:30 बजे 13.6° उत्तरी अक्षांश और 82.5° पूर्वी देशांतर पर केंद्रित था। यह चेन्नई से लगभग 260 किलोमीटर पूर्व-उत्तरपूर्व और नेल्लोर से 290 किलोमीटर पूर्व-दक्षिणपूर्व में था।
मौसम विभाग का अनुमान है कि तूफान 2 नवंबर की रात 11:30 बजे से 3 नवंबर की सुबह 4 बजे के बीच नेल्लोर और नरसापुर के बीच, ओंगोल के आसपास दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट को पार करेगा। तटीय निचले इलाकों में समुद्री जलस्तर बढ़ने और जलभराव का खतरा भी जताया गया है।
प्रशासन और आम लोगों के लिए सावधानी
तटीय इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें।
मछुआरे समुद्र में न जाएं।
तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर मकानों से दूर रहें।
किसान कटी हुई फसल और कृषि उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखें।
गरज-चमक के दौरान खुले मैदान में न रहें।
विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्सों में 3 और 4 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। मौसम विभाग के अगले बुलेटिन में पूर्वानुमान में बदलाव हो सकता है।
स्रोत: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), राष्ट्रीय चक्रवात बुलेटिन संख्या 11, 2 नवंबर 2026, सुबह 5 बजे तथा क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान।
नोट: झारखंड और मध्य प्रदेश के लिए बताई गई बारिश की संभावना अलग क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान पर आधारित है। इन दोनों राज्यों के लिए चक्रवात के सीधे प्रभाव की समान स्तर की चेतावनी जारी होने का दावा नहीं किया गया है।


