रांची:
ईसाई समुदाय द्वारा आज 2 नवंबर 2026 को ‘ऑल सोल्स डे’ यानी ‘सभी दिवंगत आत्माओं का दिवस’ पूरे देश में पारंपरिक आस्था के साथ ‘कब्र पर्व’ के रूप में मनाया जा रहा है। इस पावन अवसर पर रोमन कैथोलिक और अन्य मसीही विश्वासी अपने उन माता-पिता, परिजनों और पूर्वजों को भावपूर्ण स्मरण कर रहे हैं, जो संसार से विदा ले चुके हैं। आज के दिन दिवंगत आत्माओं की अनंत शांति और मोक्ष के लिए गिरजाघरों व कब्रिस्तानों में विशेष प्रार्थनाएं और मिस्सा अनुष्ठान किए जा रहे हैं।
कब्र पर्व को लेकर मसीही समुदाय के लोगों ने कब्रिस्तानों की साफ-सफाई और रंग-रोगन की तैयारियां पहले ही पूरी कर ली थीं। आज दोपहर बाद से ही विभिन्न इलाकों के कब्रिस्तानों में श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने लगी है। परिवार के सदस्य अपने पूर्वजों की कब्रों पर ताजे फूल, मालाएं अर्पित कर रहे हैं और धूप व मोमबत्तियां जलाकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं। जलती हुई मोमबत्तियों की रोशनी को ईसाई धर्म में अमर आत्मा, विश्वास और स्वर्गीय आशा का प्रतीक माना जाता है। शाम ढलते ही कब्रिस्तान मोमबत्तियों की रोशनी से जगमगा उठेंगे।
कब्रिस्तानों में विभिन्न पल्लियों के धर्मगुरुओं और पुरोहितों के सान्निध्य में विशेष सामूहिक प्रार्थना और मिस्सा बलिदान (Holy Mass) अर्पित किया जा रहा है। कैथोलिक धर्मग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार, संसार छोड़ चुके अपने पूर्वजों और प्रियजनों के लिए प्रार्थना करना जीवित विश्वासी का एक प्रमुख आध्यात्मिक कर्तव्य माना गया है। सामूहिक मिस्सा में श्रद्धालु ईश्वर से अपने प्रियजनों के पापों की क्षमा और उन्हें प्रभु के राज्य में शाश्वत सुख प्रदान करने की सामूहिक विनती कर रहे हैं।
धार्मिक परंपरा के तहत 1 नवंबर को ‘ऑल सेंट्स डे’ (सभी संतों का दिवस) मनाया जाता है, जो ईश्वर और मानवता की सेवा में जीवन समर्पित करने वाले संतों की स्मृति को समर्पित होता है। वहीं आज 2 नवंबर का दिन यानी ‘ऑल सोल्स डे’ परिवार और समाज के प्रत्येक उस व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए समर्पित है जो मृत्यु के बाद अनंत यात्रा पर हैं। यह पर्व केवल शोक व्यक्त करने का नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति सम्मान, प्रेम और पारिवारिक आत्मीयता के बंधन को जीवंत बनाए रखने का प्रतीक है।


