रायपुर:
‘अर्नब’ के बाद अब बंगाल की खाड़ी में सक्रिय हुआ चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ (Cyclone Murasu) तेजी से ताकतवर होकर आगे बढ़ रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार दक्षिण-पूर्व और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना यह चक्रवाती तंत्र पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में गंभीर चक्रवात का रूप ले सकता है। इसके 3 नवंबर की सुबह दक्षिण आंध्र प्रदेश तट पर नेल्लोर और नरसापुर के बीच टकराने की संभावना है, जहां हवा की गति 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इस शक्तिशाली चक्रवात का सीधा असर छत्तीसगढ़ के मौसम पर पड़ने जा रहा है, जिससे प्रदेश के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में झमाझम बारिश, आंधी और आकाशीय बिजली गिरने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
प्रदेश में 2 नवंबर से ही मौसमी बदलाव साफ नजर आने लगा है, जबकि 3 और 4 नवंबर को चक्रवात का असर चरम पर रहेगा। राजधानी रायपुर और आसपास के इलाकों में 2 नवंबर को आसमान में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बौछारें पड़ने का अनुमान है। रायपुर में अधिकतम तापमान करीब 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है। वहीं बीते 24 घंटों के दौरान प्रदेश के चुनिंदा हिस्सों में हल्की बारिश दर्ज की गई, जिसमें बलरामपुर में 5 सेमी और ओरछा में 1 सेमी वर्षा रिकॉर्ड हुई। प्रदेश में सर्वाधिक अधिकतम तापमान जगदलपुर में 31.6 डिग्री और सबसे कम न्यूनतम तापमान पेंड्रा रोड में 16.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
चक्रवाती प्रणाली के उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने से छत्तीसगढ़ के जिलों में 3 और 4 नवंबर को मौसमी गतिविधियां उग्र रूप ले सकती हैं। बस्तर, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर जैसे दक्षिणी जिलों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज अंधड़ चलने के साथ भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके अलावा मध्य छत्तीसगढ़ के जिलों—रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा, बालोद, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, राजनांदगांव, कबीरधाम और खैरागढ़ में अनेक स्थानों पर मध्यम से भारी वर्षा तथा आकाशीय बिजली गिरने की आशंका है। उत्तरी छत्तीसगढ़ के बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, रायगढ़, सरगुजा, जशपुर, सूरजपुर और बलरामपुर जिलों में भी बादलों का डेरा रहेगा और गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर बारिश दर्ज हो सकती है।
मौसम विभाग ने चक्रवात के खतरे को देखते हुए प्रशासन और आम नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी है। भारी वर्षा और तेज हवाओं से पककर तैयार धान की फसलों को नुकसान पहुंचने का अंदेशा है, जिसे देखते हुए किसानों को कटी हुई फसल सुरक्षित स्थानों पर रखने की हिदायत दी गई है। इसके साथ ही आकाशीय बिजली और अंधड़ के दौरान खुले खेतों, पेड़ों या कमजोर संरचनाओं के नीचे खड़े होने से बचने और मौसम संबंधी चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखने की अपील की गई है।


