रायपुर। उच्चतम न्यायालय के मार्गदर्शन में देशभर के न्यायालयों में लंबित मामलों के त्वरित, सस्ते और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए 1 अगस्त 2026 से ‘मीडियेशन फॉर द नेशन 3.0’ विशेष अभियान की शुरुआत की गई है। इस राष्ट्रव्यापी अभियान का मुख्य उद्देश्य आपसी सहमति से मुकदमों का निस्तारण कर आम नागरिकों को राहत देना और समाज में संवाद की भावना को मजबूत करना है।अभियान के तहत जिला और तालुका अदालतों में लंबित ऐसे सभी प्रकरणों को चिह्नित किया जा रहा है, जिनमें पक्षकारों के बीच आपसी समझौते की गुंजाइश है।
मध्यस्थता के मुख्य लाभ
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समय और धन की बचत: लंबी अदालती प्रक्रियाओं और वकीलों की भारी-भरकम फीस के मुकाबले यह एक सरल और त्वरित माध्यम है।
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गोपनीयता और निष्पक्षता: प्रशिक्षित मध्यस्थ दोनों पक्षों की बात को पूरी तरह गोपनीय रखते हुए एक निष्पक्ष माहौल तैयार करते हैं।
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संबंधों में मधुरता: जीत-हार के बजाय आपसी सहमति से समाधान होने के कारण पक्षकारों के आपसी संबंध टूटने से बच जाते हैं।
किन मामलों का हो सकेगा समाधान?
इस विशेष अभियान के अंतर्गत निम्नलिखित प्रकार के दीवानी (Civil) मामलों को मध्यस्थता के लिए भेजा जा सकता है:
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पारिवारिक एवं वैवाहिक विवाद
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मोटर दुर्घटना दावा (MACC) प्रकरण
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चेक बाउंस मामले (Section 138 NI Act)
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उपभोक्ता विवाद (Consumer Disputes)
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व्यापारिक, वाणिज्यिक और श्रम विवाद
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संपत्ति बंटवारा, बेदखली व सेवा संबंधी मामले
कैसे उठाएं योजना का लाभ?
जिन नागरिकों का मामला जिला या तालुका न्यायालय में लंबित है, वे संबंधित जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), तालुका कोर्ट अथवा जिला मध्यस्थता केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। दोनों पक्षों की लिखित सहमति के बाद केस को मध्यस्थता के लिए भेज दिया जाता है। प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे मुकदमों को लंबा खींचने के बजाय ‘विवाद नहीं, संवाद’ का रास्ता चुनें और ‘मीडियेशन फॉर द नेशन 3.0’ का लाभ उठाएं।

