रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान आज प्रदेश में जन्म दर और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक ऐसी सरकारी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने नीति निर्माताओं से लेकर आम जनता तक का ध्यान खींचा है। विधायक श्री अजय चंद्राकर द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या 16 (क्र. 478) के लिखित जवाब में लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने राज्य की वर्तमान प्रजनन दर (फर्टिलिटी रेट) के आधिकारिक आंकड़े पटल पर रख दिए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार, छत्तीसगढ़ ने जनसंख्या स्थिरता के मामले में राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी और अभूतपूर्व कामयाबी हासिल कर ली है।
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अगर हम सबसे पहले राज्य की वर्तमान प्रजनन दर की बात करें तो राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) के वर्ष 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य का प्रजनन दर घटकर अब 1.9 पर आ चुका है। यह आंकड़ा इसलिए बेहद ऐतिहासिक और चौंकाने वाला है क्योंकि यह आदर्श रिप्लेसमेंट लेवल (जनसंख्या प्रतिस्थापन स्तर) 2.1 से भी 0.2 पॉइंट कम दर्ज किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने इस गिरावट को राज्य में जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन की दिशा में एक बेहद सकारात्मक और बड़ी प्रगति माना है।
विभागीय जवाब के विस्तृत विश्लेषण से यह साफ हुआ है कि छत्तीसगढ़ में प्रजनन दर में आई इस रिकॉर्ड कमी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण रहे हैं: परिवार नियोजन के आधुनिक साधनों के प्रति आम जनता में लगातार बढ़ती जागरूकता इसका सबसे पहला कारण है। शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं और अस्पतालों में गर्भनिरोधक साधनों की पर्याप्त उपलब्धता होना है। राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का मैदानी स्तर पर सुदृढ़ क्रियान्वयन है, जिससे शिशु मृत्यु दर में कमी आई है और लोगों का रुझान छोटे परिवार की ओर बढ़ा है।
जनसंख्या को स्थिर रखने और दो बच्चों के जन्म के बीच एक सुरक्षित अंतर बनाए रखने के उद्देश्य से केंद्र और राज्य सरकार द्वारा ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में निरंतर जन-जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इसके तहत शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में ‘अंतरा’ इंजेक्शन और ‘छाया’ गर्भनिरोधक गोली सहित कई अन्य आधुनिक साधन बिल्कुल मुफ्त उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन प्रयासों का एकमात्र उद्देश्य स्वस्थ शिशुओं का जन्म सुनिश्चित करना, मातृ स्वास्थ्य में सुधार करना और जनसंख्या स्थिरीकरण के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से हासिल करना है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अब यह साफ हो गया है कि छत्तीसगढ़ जागरूक स्वास्थ्य नीतियों के दम पर जनसंख्या नियंत्रण के मामले में राष्ट्रीय मानकों से भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों की अग्रिम कतार में शामिल हो गया है।
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