रायपुर। छत्तीसगढ़ की विद्युत कंपनियों में कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाली की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। प्रदेशभर की सरकारी बिजली कंपनियों में करीब 9,000 अधिकारी-कर्मचारी अब भी ओपीएस के लाभ से वंचित हैं। इस गंभीर मुद्दे को लेकर ‘विद्युत अधिकारी-कर्मचारी OPS अधिकार मंच’ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन से मुलाकात कर संयुक्त ज्ञापन सौंपा और शासन स्तर पर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया।
अकेले कोरबा क्षेत्र में 3 हजार से अधिक कर्मचारी वंचित
मंच के प्रतिनिधियों ने मंत्री को अवगत कराया कि राज्य शासन के सामान्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन व्यवस्था बहाल किए जाने के बावजूद पॉवर कंपनियों के तकनीकी व गैर-तकनीकी संवर्ग को इससे बाहर रखा गया है। अकेले उद्योग मंत्री के कोरबा विधानसभा क्षेत्र में ही ऐसे वंचित कर्मचारियों की संख्या 3,000 से अधिक है। कर्मचारियों ने याद दिलाया कि ऊर्जा विभाग द्वारा पूर्व में पुरानी पेंशन लागू करने पर सैद्धांतिक सहमति दी गई थी, लेकिन अब तक इसके औपचारिक क्रियान्वयन का आदेश जारी नहीं हो सका है।
सीएम की आंतरिक बैठक में मामला उठाने का भरोसा
प्रतिनिधिमंडल की मांगों को सुनने के बाद मंत्री लखनलाल देवांगन ने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने आश्वस्त किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में होने वाली मंत्री समूह की आंतरिक बैठक में वे बिजली कर्मचारियों की पेंशन बहाली का विषय प्रमुखता से रखेंगे। इसके साथ ही 30 सितंबर को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक के मद्देनजर मंत्री ने मंच को ऊर्जा विभाग और विद्युत कंपनी प्रबंधन स्तर से आवश्यक प्रस्ताव तैयार करवाने का प्रयास करने का सुझाव भी दिया।
मांग पूरी न होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी
अधिकार मंच में अभियंता संघ, पत्रोपाधि अभियंता संघ, ऑफिसर्स एसोसिएशन, डॉक्टर्स एसोसिएशन और बिजली कर्मचारी यूनियनों के प्रतिनिधि शामिल रहे। मंच के पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि पेंशन कर्मचारियों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा अत्यंत संवेदनशील विषय है। यदि आगामी बैठकों के बाद भी सरकार ने ओपीएस बहाली पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशव्यापी आंदोलन को और तेज किया जाएगा। फिलहाल 9 हजार बिजली कर्मियों की निगाहें आज मुख्यमंत्री स्तर पर होने वाली चर्चा पर टिकी हैं।























