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नई दिल्ली:
देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था (School Education System) में लगातार बड़े सुधार देखने को मिल रहे हैं, लेकिन नेशनल एजुकेशन पॉलिसी यानी राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 (NEP 2020) के बड़े लक्ष्यों को पूरी तरह हासिल करना अभी बाकी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 की लेटेस्ट रिपोर्ट 2025-26 बताती है कि इस साल भी देश का कोई भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश (UT) टॉप की सर्वोच्च तीन परफॉर्मेंस श्रेणियों में अपनी जगह नहीं बना सका है। हालांकि, राहत की बात यह है कि कई राज्यों ने अपने पुराने रिकॉर्ड में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है और नई श्रेणियों में एंट्री मारी है, भले ही वे सबसे ऊंचे मुकाम तक न पहुंच पाए हों। रिपोर्ट के बड़े आंकड़ों को देखें तो इस वक्त देशभर में 14.67 लाख से अधिक स्कूल ऑपरेट हो रहे हैं, जिनमें पढ़ाने वाले शिक्षकों (Teachers) की संख्या रिकॉर्ड 1.03 करोड़ तक पहुंच गई है। वहीं, इन स्कूलों में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स की संख्या लगभग 24.72 करोड़ है। इतनी विशाल संख्या के साथ भारतीय स्कूली शिक्षा प्रणाली पूरी दुनिया की सबसे बड़ी शिक्षा व्यवस्थाओं में से एक बन चुकी है, जिसकी क्वालिटी और एडमिनिस्ट्रेशन को परखने के लिए मंत्रालय हर साल यह रिपोर्ट जारी करता है।
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इस बार के मूल्यांकन में चंडीगढ़ देश का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला केंद्र शासित प्रदेश बनकर उभरा है। सबसे ज्यादा अंक हासिल करके चंडीगढ़ ‘उत्तम-3’ ग्रेड में पहुंचने वाला देश का एकमात्र राज्य या केंद्रशासित प्रदेश बना है, जो यह दिखाता है कि चंडीगढ़ ने शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासनिक दक्षता और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में शानदार काम किया है। इस लिस्ट में चंडीगढ़ के ठीक बाद दूसरे नंबर पर राजधानी दिल्ली, केरल, पंजाब तथा दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव को संयुक्त रूप से ‘प्रचेष्टा-1’ श्रेणी में रखा गया है। वहीं, महाराष्ट्र, ओडिशा, गोवा, हिमाचल प्रदेश और लक्षद्वीप ने ‘प्रचेष्टा-2’ ग्रेड अपने नाम किया है। इनके अलावा 13 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को ‘प्रचेष्टा-3’ तथा बचे हुए 13 को ‘आकांक्षी-1’ श्रेणी में जगह मिली है, जिससे साफ़ होता है कि अभी भी कई इलाकों में जमीनी स्तर पर बहुत मेहनत की जरूरत है।
स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा तैयार किया गया यह ‘PGI 2.0’ इंडेक्स राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के एजुकेशनल परफॉर्मेंस का मूल्यांकन करने वाला एक बहुत बड़ा नेशनल स्टैंडर्ड है। इसका असली मकसद राज्यों के बीच कोई भेदभाव या केवल रैंकिंग करना नहीं है, बल्कि उन्हें उनके परफॉर्मेंस के आधार पर अलग-अलग ग्रेड देकर सुधार की सही दिशा दिखाना है ताकि राज्यों के बीच एक हेल्दी कॉम्पिटिशन (स्वस्थ प्रतिस्पर्धा) को बढ़ावा मिल सके। यह पूरा फ्रेमवर्क 1000 अंकों पर आधारित है, जिसके तहत 70 अलग-अलग संकेतकों (Indicators) को शामिल किया जाता है। इन संकेतकों को दो मुख्य कैटेगरीज़ यानी फाइनल रिजल्ट (परिणाम) और गुड गवर्नेंस (सुशासन एवं प्रबंधन) में बांटा गया है। इसके अंतर्गत सीखने के परिणाम और गुणवत्ता, शिक्षा तक पहुंच, इंफ्रास्ट्रक्चर एवं सुविधाएं, समानता एवं समावेशन, प्रशासनिक प्रक्रियाएं और शिक्षक शिक्षा एवं प्रशिक्षण जैसे छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों का गहराई से असेसमेंट किया जाता है, जिसके लिए यूडीआईएसई प्लस, परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण, पीएम पोषण पोर्टल, प्रबंध पोर्टल और विद्यांजलि पोर्टल के प्रामाणिक आंकड़ों का उपयोग किया गया है।
राज्यों के साथ-साथ जमीनी स्तर पर ब्लॉक और जिला स्तर की हकीकत को समझने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने ‘PGI-D’ (जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स) का ढांचा भी तैयार किया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह चेक करना है कि केंद्र और राज्य सरकारों की बड़ी-बड़ी शैक्षिक योजनाओं का वास्तविक प्रभाव जिला स्तर पर कितना दिखाई दे रहा है। PGI-D के तहत कुल 600 अंकों के दायरे में 70 संकेतकों का मूल्यांकन किया जाता है, जिसमें स्टूडेंट्स के सीखने के परिणाम, क्लासरूम टीचिंग की प्रभावशीलता, स्कूल की बुनियादी सुविधाएं, छात्र अधिकार, विद्यालय सुरक्षा, डिजिटल एजुकेशन और एडमिनिस्ट्रेटिव प्रोसेस जैसे अहम पहलुओं को परखा जाता है। यह पूरा ढांचा कुल 11 प्रमुख कोर एरिया पर आधारित है, जिसमें शिक्षण की गुणवत्ता, शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता, डिजिटल लर्निंग, स्कूल नेतृत्व विकास और फंड्स के प्रभावी उपयोग जैसे गंभीर विषयों को शामिल किया गया है ताकि निचले स्तर से ही देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाया जा सके।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (PGI) 2.0 की लेटेस्ट रिपोर्ट 2025-26 के अनुसार, छत्तीसगढ़ की स्कूली शिक्षा व्यवस्था (School Education System) में पहले के मुकाबले सुधार तो दर्ज किया गया है, लेकिन नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) के बड़े लक्ष्यों को पूरी तरह हासिल करने के लिए अभी एक लंबी यात्रा तय करना बाकी है। इस साल की राष्ट्रीय रिपोर्ट बताती है कि देश का कोई भी राज्य टॉप की सर्वोच्च तीन परफॉर्मेंस श्रेणियों यानी ‘दक्ष’, ‘उत्कर्ष’ और ‘अति-उत्तम’ में अपनी जगह नहीं बना सका है, और इसी रेस में हमारे छत्तीसगढ़ को देश के उन 13 राज्यों की सूची में शामिल किया गया है जिन्हें ‘प्रचेष्टा-3’ (Prachesta-3) या ‘आकांक्षी-1’ (Aspirant-1) ग्रेड के अंतर्गत रखा गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि अपने प्रदेश के स्कूलों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और सुशासन (Governance) के मोर्चे पर काम तो आगे बढ़ा है, लेकिन दिल्ली, केरल या चंडीगढ़ जैसे टॉप परफॉर्मिंग राज्यों की बराबरी करने के लिए अभी जमीनी स्तर पर बड़े बदलावों और कड़ी मेहनत की जरूरत है।
शिक्षा मंत्रालय का यह पूरा PGI 2.0 इंडेक्स कुल 1000 अंकों पर आधारित है, जिसके तहत राज्यों के शैक्षिक प्रदर्शन को मापने के लिए 70 अलग-अलग संकेतकों (Indicators) को परखा जाता है। छत्तीसगढ़ का यह वर्तमान ग्रेड मुख्य रूप से राज्य के सरकारी और निजी स्कूलों में डिजिटल लर्निंग की स्थिति, क्लासरूम में शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता, स्कूली बच्चों की सुरक्षा, पीएम पोषण (मध्यान्ह भोजन) योजना के क्रियान्वयन और सबसे जरूरी बच्चों के सीखने की गुणवत्ता (Learning Outcomes) के आधार पर तय किया गया है। इसके साथ ही, जिले और ब्लॉक स्तर पर योजनाओं का वास्तविक प्रभाव देखने के लिए मंत्रालय ने ‘PGI-D’ (जिलों के लिए परफॉर्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स) का 600 अंकों वाला ढांचा भी तैयार किया है, जिसके तहत शिक्षण गुणवत्ता, स्कूल नेतृत्व विकास और सरकारी फंड्स के सही और प्रभावी उपयोग जैसे 11 प्रमुख कोर एरिया का मूल्यांकन किया जाता है, ताकि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के दूरदराज और ग्रामीण अंचलों के स्कूलों को भी पूरी तरह हाईटेक और सर्वसुविधायुक्त बनाया जा सके।

