जशपुर जिले में VB-G RAM G मिशन के तहत संविदा पदों पर बंपर भर्ती , देखें डिटेल…
रायपुर: छत्तीसगढ़ में खादी और हाथकरघा से बने वस्त्रों के उपयोग को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने के लिए ग्रामोद्योग विभाग ने एक अहम फैसला लिया है। विभाग ने यह निर्देश जारी किया है कि सभी अधिकारी और कर्मचारी विभागीय समीक्षा बैठकों, शासकीय कार्यक्रमों तथा आधिकारिक आयोजनों में अनिवार्य रूप से हाथकरघा, खादी और छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा व सूती कपड़ों से बने परिधान ही पहनेंगे। ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह संचालक सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा ने हाल ही में हुई एक बैठक में ये निर्देश दिए हैं।
छत्तीसगढ़ शासन का बड़ा फैसला: प्रतिनियुक्ति पर सेवानिवृत्त होने वाले शासकीय सेवकों की पेंशन और उपदान प्रक्रिया का होगा सरलीकरण
बुनकरों और महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा सीधा लाभ
इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य के स्थानीय वस्त्र उत्पादों की बिक्री को रफ्तार देना और पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देना है। खादी, कोसा और सूती कपड़ों की मांग बढ़ने से छत्तीसगढ़ के बुनकरों, शिल्पकारों और कारीगरों के लिए रोजगार के नए अवसर बनेंगे। इसके साथ ही, सिलाई कार्यों से जुड़ी महिला स्वयं सहायता समूहों को भी नियमित काम मिलने से उनकी आजीविका मजबूत होगी। बता दें कि छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट पारंपरिक कोसा और सूती वस्त्र कला के लिए पूरे देश में मशहूर है।
मिशन कर्मयोगी: छत्तीसगढ़ के सभी कर्मचारियों के लिए तनाव प्रबंधन का पाठ अनिवार्य, 31 अक्टूबर तक डेडलाइन तय
इन प्रमुख बोर्डों और संस्थाओं में लागू होंगे नियम
ग्रामोद्योग विभाग के अधीन आने वाले विभिन्न बोर्डों और संस्थानों के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों पर यह नियम लागू होगा। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- हाथकरघा, रेशम, खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड
- हस्तशिल्प विकास बोर्ड और माटीकला बोर्ड
- छत्तीसगढ़ राज्य हाथकरघा विकास एवं विपणन सहकारी संघ मर्यादित, रायपुर
इन संस्थाओं के सभी कार्मिकों को अब सरकारी बैठकों और कार्यक्रमों में केवल स्थानीय और पारंपरिक वस्त्र पहनने होंगे।
सप्ताह में एक दिन खादी पहनने की सलाह
विभाग इस योजना का दायरा बढ़ाकर इसे राज्य, संभाग, जिला और ब्लॉक स्तर के सभी सरकारी कार्यालयों तक ले जाने की तैयारी कर रहा है। इसके तहत सभी स्तर के कर्मचारियों को हफ्ते में कम से कम एक दिन हाथकरघा और खादी वस्त्र पहनने का सुझाव दिया गया है। सरकारी बैठकों में स्थानीय कपड़ों को प्राथमिकता मिलने से आम जनता में भी इनके प्रति रुझान बढ़ेगा और राज्य की लोक संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा।


