रायपुर -शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और वरिष्ठता के सम्मान को लेकर प्रदेश में एक नए अभियान की शुरुआत की गई है। “वरिष्ठता का सम्मान–सेवा सुरक्षा अभियान” के माध्यम से शिक्षकों ने TET नियमों में आवश्यक संशोधन की मांग को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है।
अभियान से जुड़े शिक्षक नेताओं का कहना है कि TET के नियमों में संशोधन जरूरी है, अन्यथा आंदोलन ही हमारी मजबूरी होगी। शिक्षकों के बीच यह संदेश तेजी से प्रसारित किया जा रहा है कि यदि उनकी नौकरी और सेवा सुरक्षा पर संकट आता है तो वे अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करेंगे।
अभियान के तहत छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों के शिक्षकों को जोड़ते हुए व्यापक स्तर पर आंदोलन की रणनीति तैयार की जा रही है। अभियान का मुख्य उद्देश्य वरिष्ठता का सम्मान, सेवा सुरक्षा और शिक्षकों के हितों की रक्षा करना बताया गया है।
पोस्टर के माध्यम से रविंद्र राठौर, प्रदीप पाण्डेय एवं विकास सिंह राजपूत सहित संगठन के पदाधिकारियों ने शिक्षकों से एकजुट होकर संघर्ष में भागीदारी निभाने का आह्वान किया है। वहीं प्रदेश प्रवक्ता मोहम्मद यासीर इरफान ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जब बात शिक्षकों की नौकरी पर आएगी, तब आंदोलन करना मजबूरी बन जाएगा।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के भविष्य को प्रभावित करने वाले किसी भी निर्णय पर सरकार को संवेदनशीलता के साथ विचार करना चाहिए। नियमों में आवश्यक संशोधन कर शिक्षकों को राहत देने तथा उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग को लेकर आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक रूप देने की तैयारी है।
“एकता, सहयोग, संघर्ष और सम्मान” के संकल्प के साथ आगे बढ़ेगा अभियान
अभियान से जुड़े नेताओं ने प्रदेशभर के शिक्षकों से अपील की है कि वे आपसी मतभेदों को भूलकर एकजुट हों और “नौकरी बचाओ आंदोलन” को मजबूत बनाएं। उनका कहना है कि शिक्षकों की एकजुटता ही उनके अधिकारों और सेवा सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है।

