नई दिल्ली/भुवनेश्वर: क्या बंगाल की खाड़ी से उठकर ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों की ओर बढ़ रहा वेदर सिस्टम सचमुच एक चक्रवाती तूफान है? सोशल मीडिया पर ‘चक्रवात अर्नब’ (Cyclone Arnab) को लेकर मचे घमासान और दहशत के बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने स्थिति साफ कर दी है। मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि आधिकारिक तौर पर ‘चक्रवात अर्नब’ नाम का कोई चक्रवाती तूफान अभी अस्तित्व में नहीं आया है। बंगाल की खाड़ी में सक्रिय यह प्रणाली फिलहाल केवल एक ‘डीप डिप्रेशन’ (गहरा दबाव क्षेत्र) है, जिसे चक्रवात का दर्जा नहीं मिला है।
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क्यों इसे अभी ‘चक्रवात अर्नब’ कहना गलत है?
मौसम विज्ञान के तय अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों के अनुसार:
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नामकरण की तय सीमा: किसी भी समुद्री वेदर सिस्टम को चक्रवात का नाम तभी आवंटित किया जाता है, जब उसमें हवाओं की निरंतर गति कम से कम 63 किलोमीटर प्रति घंटा (34 समुद्री मील) या उससे अधिक दर्ज की जाए।
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वैज्ञानिक स्थिति: वर्तमान सिस्टम अभी इस निर्धारित तीव्रता तक नहीं पहुंचा है। यह एक गहरा दबाव (Deep Depression) मात्र है। इसलिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे आधिकारिक तौर पर चक्रवात कहना पूरी तरह भ्रामक है।
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पूर्ण चक्रवात नहीं, फिर भी क्यों है भारी खतरा?
यदि यह सिस्टम पूर्ण चक्रवाती तूफान नहीं बना है, तो क्या तटीय राज्यों को राहत की सांस लेनी चाहिए? मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बिल्कुल नहीं। डीप डिप्रेशन होने के बावजूद इसका प्रभाव काफी विनाशकारी हो सकता है:
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तट से टकराने का अनुमान: यह गहरा दबाव उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा के तटों की ओर लगातार बढ़ रहा है। इसके विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच स्थित कलिंगपट्टनम के पास से गुजरने की प्रबल संभावना है।
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भारी बारिश और तेज हवाएं: इसके असर से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की जा रही है। समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही हैं और तेज रफ्तार हवाएं चल रही हैं।
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प्रशासनिक सतर्कता: संभावित नुकसान को देखते हुए ओडिशा के संवेदनशील जिलों में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त हिदायत दी गई है और एनडीआरएफ/एसडीआरएफ की टीमें तैनात कर दी गई हैं।
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कोई वेदर सिस्टम आखिर कब बनता है ‘चक्रवाती तूफान’?
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, समुद्र की सतह पर निम्नलिखित भौगोलिक व पर्यावरणीय परिस्थितियों के मिलने पर ही चक्रवात का जन्म होता है:
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समुद्र की गर्मी: चक्रवात के निर्माण के लिए समुद्री सतह का तापमान कम से कम 27°C या उससे अधिक होना अनिवार्य है।
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निम्न वायुदाब का केंद्र: गर्म हवाएं तेजी से ऊपर उठती हैं, जिससे समुद्र की सतह पर गहरा निम्न दबाव (Low Pressure) बन जाता है।
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पृथ्वी का घूर्णन (कोरियोलिस बल): पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूमने के कारण आसपास की ठंडी हवाएं तेजी से केंद्र की ओर आती हैं और एक वृत्ताकार घेरे में घूमने लगती हैं।
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हवा की गति 63 किमी/घंटा पार: जब इस घूमती हुई वायु प्रणाली में नमी और ऊर्जा का निरंतर प्रवाह होता है और हवाओं की रफ्तार 63 किमी प्रति घंटे के पार चली जाती है, तभी इसे आधिकारिक तौर पर ‘चक्रवाती तूफान’ घोषित कर पूर्व-निर्धारित सूची से नाम दिया जाता है।























