दीपावली का पावन पर्व सिर्फ दीपों, पटाखों और मिठाइयों तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं और मान्यताओं को सहेजने का भी दिन है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के बाद पकवानों की थाली में एक खास सब्जी जरूर नजर आती है—वह है सूरन, जिसे ओल या जिमीकंद भी कहा जाता है। दिवाली पर इसे बनाने और खाने की परंपरा इतनी गहरी है कि बाजारों में सूरन खरीदने की होड़ मची रही और यह 80 से 100 रुपये प्रति किलो तक बिका।
क्यों शुभ माना जाता है दिवाली पर सूरन खाना?
धार्मिक और लोक मान्यताओं के अनुसार, सूरन को सुख, समृद्धि और निरंतर प्रगति का प्रतीक माना जाता है।
सूरन एक कंद (जड़ वाली) सब्जी है। इसकी खासियत यह है कि इसकी जड़ को जमीन से जितना भी काटा जाए, यह दोबारा अंकुरित होकर उग आती है। इसी अटूट गुण के कारण इसे जीवन में सुख-शांति, स्थिरता और वंश वृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। माना जाता है कि दिवाली के दिन इसे बनाने से घर में मां लक्ष्मी का स्थायी वास होता है।ग्रामीण अंचलों में यह दिलचस्प कहावत भी प्रचलित है कि दिवाली की रात सूरन न खाने वाला व्यक्ति अगले जन्म में छछूंदर या नेवला बनता है। हालांकि यह केवल एक लोकचर्चा है, लेकिन इसने सूरन को हर घर की थाली का अनिवार्य हिस्सा बना दिया है।

स्वाद के साथ सेहत का खजाना: औषधीय गुणों से भरपूर
आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा दोनों ही सूरन को सेहत के लिए अत्यंत गुणकारी मानते हैं: इसमें प्रचुर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व पाए जाते हैं, जो बदलते मौसम में पाचन तंत्र को दुरुस्त रखते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, फाइबर से भरपूर होने के कारण यह वजन नियंत्रित करने, डायबिटीज के मरीजों के लिए और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में सहायक है।
किसानों के लिए मुनाफे का सौदा
कौड़िहार और आसपास के क्षेत्रों के किसानों—सुरेश यादव, मनोज कुमार और मुलायम—के अनुसार, सूरन की खेती कम लागत और कम मेहनत में बढ़िया मुनाफा देती है।इसकी बोआई मार्च-अप्रैल में की जाती है और 5 से 6 महीने में फसल तैयार हो जाती है।अक्टूबर के पहले हफ्ते से इसकी खोदाई शुरू होती है।फसल के खराब होने या सूखने का जोखिम न के बराबर होता है, और दिवाली के आसपास मांग बढ़ने से किसानों को इसका उचित दाम मिल जाता है।

कैसे बनाएं कि गले में न लगे खुजली?
सूरन में मौजूद कैल्शियम ऑक्सालेट के कारण इसे काटते या खाते समय गले में हल्की खुजली या चुनचुनाहट हो सकती है। इसे दूर करने का सही तरीका:
-
उबालना: सूरन को छीलकर टुकड़ों में काट लें और कुकर में हल्का उबाल लें।
-
तलना: उबले हुए टुकड़ों को तेल में सुनहरा होने तक भूनें।
-
मसालेदार ग्रेवी और खटाई: प्याज, लहसुन, टमाटर और गरम मसालों के साथ ग्रेवी तैयार कर सूरन को पकाएं।
-
नींबू का उपयोग: सब्जी पकने के बाद अंत में नींबू का रस, अमचूर या इमली का पानी जरूर मिलाएं। खटास से गले में लगने वाली खुजली पूरी तरह खत्म हो जाती है और सब्जी का स्वाद लाजवाब हो जाता है।


