बिलासपुर/बिल्हा। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में शिक्षकों की अनुपस्थिति को लेकर जारी कारण बताओ नोटिस के बाद अब संकुल पोसरी के शिक्षकों ने अपना पक्ष सामने रखा है। शिक्षकों का कहना है कि कार्यक्रम से अनुपस्थित रहने के पीछे किसी प्रकार की लापरवाही या शासकीय निर्देशों की अवहेलना नहीं थी, बल्कि अचानक बिगड़े मौसम, अंधेरा और विशेष रूप से महिला शिक्षकों की सुरक्षा से जुड़ी परिस्थितियों को देखते हुए स्थल से वापस लौटने का निर्णय लिया गया था।
शिक्षकों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बिल्हा को सौंपे अपने लिखित स्पष्टीकरण में पूरे घटनाक्रम का तथ्यात्मक विवरण देते हुए मीडिया में आई कुछ खबरों को वास्तविक स्थिति से अलग बताया है।
बिना लिखित आदेश के ड्यूटी, फिर कारण बताओ नोटिस
शिक्षकों का कहना है कि ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में उपस्थिति के लिए उन्हें कोई औपचारिक अथवा लिखित ड्यूटी आदेश प्राप्त नहीं हुआ था। उन्हें केवल व्हाट्सऐप संदेश के माध्यम से कार्यक्रम में लगभग दो घंटे सहयोग के लिए सूचित किया गया था।
शिक्षकों ने इसी आधार पर सवाल उठाया है कि जब विधिवत लिखित ड्यूटी आदेश जारी नहीं किया गया था, तो अनुपस्थिति के आधार पर कारण बताओ नोटिस जारी करने की प्रक्रिया कितनी उचित है। उनका कहना है कि उन्होंने प्रशासनिक निर्देशों का सम्मान करते हुए उपलब्ध परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया।
17 सितंबर को कार्यक्रम स्थल पर शाम 6 बजे तक मौजूद थे शिक्षक
शिक्षकों के अनुसार, 17 सितंबर 2026 को ताला (अमेरी कापा) स्थित कार्यक्रम स्थल पर वे शाम करीब 6 बजे तक उपस्थित रहे। इसी दौरान अचानक मौसम ने करवट ली और तेज आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश शुरू हो गई।
शिक्षकों का कहना है कि कार्यक्रम स्थल मुख्य मार्ग से काफी अंदर ग्रामीण क्षेत्र में स्थित था। शाम ढलने के साथ वहां अंधेरा बढ़ने लगा, जिससे वापस लौटने वाले शिक्षकों के सामने आवागमन की कठिनाई उत्पन्न हो गई। खासकर महिला शिक्षिकाओं की सुरक्षित वापसी को लेकर स्थिति गंभीर थी।
इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षकों ने कार्यक्रम स्थल से लौटने का निर्णय लिया।
अपने-अपने स्कूलों में किया दीप प्रज्ज्वलन
शिक्षकों ने अपने स्पष्टीकरण में यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य कार्यक्रम से दूरी बनाना या शासकीय अभियान की अवहेलना करना नहीं था।
उनके अनुसार, पूर्व निर्धारित निर्देशों के तहत शाम 6 से 7 बजे के बीच संबंधित विद्यालयों में दीप प्रज्ज्वलन किया जाना था। इसलिए मौसम और सुरक्षा की परिस्थितियों को देखते हुए शिक्षक अपने-अपने विद्यालयों में लौटे और वहां दीप प्रज्ज्वलन कार्यक्रम में सहभागिता की।
शिक्षकों का कहना है कि इस तरह उन्होंने कार्यक्रम की भावना और शासकीय निर्देशों के अनुरूप अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास किया।
‘माफी मांगने’ की खबरों को बताया निराधार
मीडिया में शिक्षकों द्वारा माफी मांगे जाने की बात सामने आने के बाद संबंधित शिक्षकों ने इसे स्पष्ट रूप से खारिज किया है। उनका कहना है कि माफी मांगने जैसी कोई स्थिति उत्पन्न ही नहीं हुई।
शिक्षकों के मुताबिक, प्रतिकूल मौसम, अंधेरा और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के बीच लिया गया तत्काल निर्णय किसी प्रकार की जानबूझकर की गई लापरवाही या अनुशासनहीनता नहीं माना जाना चाहिए।
शिक्षकों ने कहा—कर्तव्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध
संकुल पोसरी के शिक्षकों ने कहा कि वे शासकीय कार्यक्रमों और विभागीय निर्देशों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उनका पक्ष है कि पूरे घटनाक्रम को केवल अनुपस्थिति के आधार पर देखने के बजाय उस समय उत्पन्न प्राकृतिक परिस्थितियों, आवागमन की कठिनाइयों और सुरक्षा संबंधी व्यावहारिक पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
अब शिक्षकों द्वारा सौंपे गए लिखित स्पष्टीकरण पर विभाग का क्या रुख रहता है, इस पर सबकी निगाहें टिकी हैं।























