नई दिल्ली: त्योहारी सीजन से ठीक पहले नया स्मार्टफोन खरीदने की योजना बना रहे आम उपभोक्ताओं की जेब पर बड़ा बोझ पड़ने वाला है। मार्केट रिसर्च फर्म ‘काउंटरपॉइंट रिसर्च’ की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 में भारत में स्मार्टफोन की औसत खुदरा कीमतें (Average Selling Price) 21 फीसदी तक बढ़ चुकी हैं। वैश्विक स्तर पर यह दुनिया के सभी बड़े बाजारों में दर्ज सबसे तेज उछाल है। लागत में इस तेज बढ़ोतरी के चलते जून तिमाही में 15,000 रुपये से कम वाले बजट फोनों की बिक्री में 45 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
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दुनिया भर में भारत पर सबसे ज्यादा मार
वैश्विक स्तर पर स्मार्टफोन की कीमतों में औसतन 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन विकसित देशों की तुलना में भारत में इसका असर कहीं अधिक देखा जा रहा है:
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अमेरिका: कीमतों में केवल 5% की बढ़ोतरी।
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यूरोप: औसत कीमतें 7% बढ़ीं।
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चीन: 10% का इजाफा।
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एशिया-प्रशांत: 19% की बढ़ोतरी।
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भारत: सबसे अधिक 21% की उछाल।
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भारत में क्यों बढ़ी कीमतें? बजट सेगमेंट पर दोहरी मार
भारतीय स्मार्टफोन बाजार का 51 फीसदी से अधिक हिस्सा 20,000 रुपये से कम कीमत वाले लो और मिड-रेंज सेगमेंट का है। पश्चिमी देशों में प्रीमियम फोनों की बिक्री ज्यादा होती है, जहां कंपनियां मोटा मार्जिन होने के कारण लागत खुद वहन कर लेती हैं या टेलीकॉम ऑपरेटरों के बंडल प्लान्स में लागत ईएमआई में बंट जाती है।
इसके उलट, भारत के बजट स्मार्टफोन सेगमेंट में कंपनियों के पास मार्जिन न के बराबर होता है। 15,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन में अकेले मेमोरी (रैम व स्टोरेज) की हिस्सेदारी कुल पुर्जों की लागत का 45 फीसदी से ऊपर पहुंच चुकी है। ऐसे में कंपनियों ने बढ़ी हुई उत्पादन लागत का पूरा बोझ सीधे भारतीय ग्राहकों पर डाल दिया है।
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कीमतें बढ़ने का असली कारण: AI की मांग और मेमोरी चिप का संकट
स्मार्टफोन महंगे होने की मुख्य वजह मेमोरी चिप्स (DRAM और NAND) की आसमान छूती कीमतें हैं:
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चार गुना बढ़े दाम: सितंबर 2025 के बाद से डीआरएएम और एनएएनडी चिप्स की कीमतों में करीब चार गुना का उछाल आया है।
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एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की प्राथमिकता: दुनियाभर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बढ़ती मांग के कारण प्रमुख सेमीकंडक्टर निर्माता कंपनियां अपनी उत्पादन क्षमता एआई सर्वरों के लिए ‘हाई-बैंडविड्थ मेमोरी’ (HBM) बनाने में खपा रही हैं।
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स्मार्टफोन मेमोरी की किल्लत: इस बदलाव से पारंपरिक स्मार्टफोन मेमोरी की आपूर्ति में भारी कमी आ गई है, जिससे चिप्स की कीमतें बेतहाशा बढ़ गईं।
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खरीदारों का बदला रुख: 25% ने टाली खरीदारी, रीफर्बिश्ड का बढ़ा क्रेज
वर्ष 2026 में लॉन्च हुए नए स्मार्टफोन मॉडल्स पिछले साल के मुकाबले औसतन 25 फीसदी तक महंगे बिक रहे हैं। कुछ कंपनियों ने कीमतें काबू में रखने के लिए फोनों के मेमोरी कॉन्फ़िगरेशन (रैम/स्टोरेज) तक घटा दिए हैं।
काउंटरपॉइंट रिसर्च के उपभोक्ता सर्वे में भारतीय खरीदारों का बदलता व्यवहार सामने आया है:
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46% ग्राहक: मजबूरी में अपना बजट बढ़ाकर महंगा फोन खरीद रहे हैं।
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25% ग्राहक: कीमतें बढ़ने के चलते फिलहाल नया फोन खरीदने का फैसला टाल चुके हैं।
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29% ग्राहक: पुराने या रीफर्बिश्ड (Refurbished) स्मार्टफोनों का विकल्प चुन रहे हैं।























