नई दिल्ली:
शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा शुरू की गई ‘विद्यांजलि’ पहल के माध्यम से देश के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में डिजिटल और बुनियादी ढांचे का तेजी से कायाकल्प हो रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुच्छेद 3.7 के अनुरूप यह योजना समुदाय, पूर्व छात्रों, गैर-सरकारी संगठनों (NGO) और सीएसआर (CSR) संस्थाओं को एक मंच पर लाकर स्कूलों की आवश्यकताओं को पूरा करने का काम कर रही है।
पिछले एक वर्ष के दौरान विद्यांजलि पोर्टल पर व्यापक स्तर पर पंजीकरण हुआ है, जिसमें 1,27,884 नए स्कूल, 32,581 स्वयंसेवक और 1,126 सीएसआर संगठन/एनजीओ जुड़े हैं। इस अवधि में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में एआई और रोबोटिक्स इनोवेशन लैब की स्थापना, राजस्थान के धौलपुर में डिजिटल कक्षाओं का निर्माण, मिजोरम के मामित में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करना, उत्तर प्रदेश के बागपत में डेस्कटॉप कंप्यूटर उपलब्ध कराना और बिहार के बेगुसराय में बाला (BALA) पेंटिंग के माध्यम से वातावरण में सुधार करने जैसी प्रमुख सफलताएं हासिल की गई हैं।
विद्यांजलि पोर्टल पर संस्थाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रक्रिया अपनाई गई है। एनजीओ का पंजीकरण ‘एनजीओ दर्पण पोर्टल’ की विशिष्ट आईडी के माध्यम से होता है, जबकि सीएसआर संगठनों के लिए पैन कार्ड, जीएसटी या उद्यम पंजीकरण जैसे दस्तावेज अनिवार्य हैं। सहयोग को सुगम बनाने के लिए ‘सीएसआर बल्क सहभागिता’ और ‘अडॉप्ट-ए-स्कूल’ जैसे दो मॉडल प्रदान किए गए हैं, जिनका सत्यापन और स्वीकृति राज्य तथा केंद्रीय स्तर पर की जाती है।
विशेष अभियान 5.0 (2025) के तहत ‘बालांजलि’ कार्यक्रम चलाकर स्कूलों में भित्ति कला और सौंदर्यीकरण का काम किया गया है, जो विशेष रूप से महत्वाकांक्षी और शैक्षिक रूप से पिछड़े जिलों में बाल-अनुकूल माहौल बनाने में मददगार साबित हो रहा है। इसके साथ ही, शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में ‘पारख’ (NCERT) द्वारा ‘पारख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024’ का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य बालवाटिका से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों की सीखने की दक्षता का मूल्यांकन करना था। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट कार्ड आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध करा दी गई है।

