नई दिल्ली:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF SE) 2023 के तहत देश की स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। 21वीं सदी की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने विद्यालयी शिक्षा प्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कंप्यूटेशनल थिंकिंग, डेटा साइंस और मशीन लर्निंग जैसी आधुनिक प्रौद्योगिकियों को शामिल करने की ठोस पहल की है।
शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नया पाठ्यक्रम लागू
एनसीईआरटी (NCERT) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के साथ मिलकर शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों के लिए विशेष कंप्यूटेशनल थिंकिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पाठ्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा कक्षा 9 से 12 तक के लिए एआई और उससे जुड़े विषयों के पाठ्यक्रम को भी अंतिम रूप दे दिया गया है।
यह पाठ्यक्रम छात्रों में तार्किक तर्कशक्ति, पैटर्न पहचान, एल्गोरिदम डिजाइन और डेटा साक्षरता विकसित करने के साथ-साथ नैतिक और जिम्मेदार एआई के उपयोग पर बल देगा।
शुरुआती स्तर से गणित और कोडिंग पर जोर
एनईपी 2020 के पैरा 4.25 का हवाला देते हुए कहा गया है कि भारत के भविष्य और नेतृत्वकारी भूमिका के लिए गणितीय सोच बेहद महत्वपूर्ण है।
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शुरुआती चरण (प्राथमिक स्तर): गणित को मजेदार और रोचक बनाने के लिए पहेलियों (Puzzles) और खेलों का उपयोग किया जाएगा।
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मध्य स्तर: कोडिंग से जुड़ी गतिविधियों को शिक्षण प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा।
स्कूली बुनियादी ढांचा और शिक्षक सहायता
सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूलों में एआई की पढ़ाई के लिए जरूरी डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर होना अनिवार्य किया गया है। शिक्षकों की मदद के लिए ‘शिक्षक पुस्तिकाएं’ और ‘सहायक मार्गदर्शिकाएं’ सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट (cbseacademic.nic.in) पर उपलब्ध कराई गई हैं।
इसके साथ ही, कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने ‘एसओएआर’ (SOAR – एआई तत्परता के लिए कौशल विकास) पहल की शुरुआत की है। इसके तहत कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए 15-15 घंटे के तीन मॉड्यूल और शिक्षकों के लिए 45 घंटे का विशेष एआई प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किया गया है।
राज्यों की भूमिका
शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची का विषय होने के कारण, अधिकांश सरकारी स्कूल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इसलिए अपने-अपने राज्यों के स्कूलों में एआई और रोबोटिक्स प्रयोगशालाएं स्थापित करने और उनके संचालन की मुख्य जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकारों की होगी।

