नई दिल्ली: ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी देने वाली दशकों पुरानी मनरेगा (MGNREGA) योजना की जगह अब एक नया ऐतिहासिक कानून लेने जा रहा है। केंद्र सरकार आगामी 1 जुलाई 2026 से पूरे देश में ‘वीबी-जी राम जी’ यानी ‘विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन – ग्रामीण’ योजना को आधिकारिक तौर पर लागू करने जा रही है। इस बड़े बदलाव को लेकर पुराने मनरेगा कार्ड धारकों के मन में कई सवाल हैं कि उनका पुराना जॉब कार्ड कब और कैसे बदलेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य इस नई योजना के जरिए ग्रामीण परिवारों को पहले से अधिक दिनों का गारंटीशुदा रोजगार देना और पूरी व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल एवं पारदर्शी बनाना है।
सरकार द्वारा जारी नए ड्राफ्ट नियमों में मनरेगा से ‘वीबी-जी राम जी’ योजना में बदलाव का पूरा खाका तैयार किया गया है। इसके तहत जब तक सभी राज्य इस नई व्यवस्था को पूरी तरह लागू नहीं कर देते, तब तक संक्रमण काल के दौरान भी श्रमिकों के सभी अधिकार और बकाया पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। राहत की बात यह है कि जिन गरीब मजदूर भाइयों के पुराने मनरेगा जॉब कार्ड पहले से ई-केवाईसी (e-KYC) सत्यापित हैं, वे नए सिस्टम में भी पूरी तरह वैध रहेंगे और उन्हें परेशान होने की आवश्यकता नहीं होगी।
इस नए कानून के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे सभी चालू कार्यों को बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रखा जाएगा ताकि मजदूरों की आजीविका प्रभावित न हो। अगर नियमों के तहत आवेदन करने के बाद भी किसी श्रमिक को समय पर काम नहीं मिलता है, तो उसे सीधे उसके बैंक खाते में बेरोजगारी भत्ता दिया जाएगा। इसके अलावा नए नियमों में मजदूरी के भुगतान को लेकर बेहद कड़े और साफ-सुथरे नियम तय किए गए हैं, जिससे मजदूरों को अपने पैसों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक ‘नेशनल लेवल स्टीयरिंग कमेटी’ और ‘सेंट्रल ग्रामीण रोजगार गारंटी काउंसिल’ का गठन किया जाएगा, जो प्रशासनिक खर्चों और बजट का पूरा हिसाब-किताब केंद्र सरकार की देखरेख में बेहद पारदर्शी तरीके से रखेगी। साथ ही मजदूरों की समस्याओं और शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक मजबूत शिकायत निवारण सिस्टम भी बनाया जा रहा है।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले देश के सभी राज्यों, खेल विशेषज्ञों और आम जनता से रचनात्मक सुझाव मांगे गए हैं। अगर कोई संस्था, सिविल सोसाइटी या आम नागरिक इस योजना के नियमों में कोई बदलाव या सुधार चाहता है, तो वह सार्वजनिक परामर्श के दौरान अपना फीडबैक सरकार को भेज सकता है। यह नया कानून देश के सभी राज्यों सहित बिना विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) में भी आगामी 1 जुलाई से एक साथ पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा।

