विश्व का नंबर 1 भुगतान प्लेटफॉर्म बना UPI: वित्त वर्ष 2026 में ₹314 लाख करोड़ का ट्रांजैक्शन, भारत ने दुनिया को दिखाई डिजिटल ताकत
नई दिल्ली
देश के बच्चों के सुनहरे भविष्य और उनके बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ (RBSK) 2.0 की नई गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। हाल ही में आयोजित ‘नेशनल समिट ऑन गुड प्रैक्टिसेज एंड इनोवेशंस इन पब्लिक हेल्थकेयर’ में इन दिशा-निर्देशों को लॉन्च किया गया जो पिछले एक दशक के अनुभवों और बच्चों की बदलती जरूरतों पर आधारित हैं।
नई योजना के तहत अब जन्म से लेकर 18 वर्ष तक के बच्चों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच प्रदान किया जाएगा जिसकी सबसे बड़ी विशेषता इसका डिजिटल स्वरूप है। बच्चों के लिए विशेष डिजिटल हेल्थ कार्ड बनाए जाएंगे और एक रियल-टाइम डेटाबेस तैयार किया जाएगा जिससे एक मजबूत रेफरल ट्रैकिंग सिस्टम विकसित होगा। यदि किसी बच्चे में जमीनी स्तर पर जांच के दौरान कोई बीमारी पाई जाती है तो उच्च केंद्रों में उसके इलाज से लेकर पूर्ण रिकवरी तक की पूरी मॉनिटरिंग पारदर्शी तरीके से की जाएगी ताकि कोई भी बच्चा इलाज के बीच में न छूटे।
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अभी तक यह कार्यक्रम मुख्य रूप से जन्मजात दोष, बीमारियां, पोषण की कमी और विकास में देरी जैसे विषयों पर केंद्रित था लेकिन अब इसका दायरा बढ़ाकर आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं को भी शामिल किया गया है। अब बच्चों में डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के साथ-साथ मानसिक सेहत और व्यवहार संबंधी समस्याओं का इलाज भी प्राथमिकता में रहेगा क्योंकि सरकार का लक्ष्य अब केवल बच्चों को बीमारियों से बचाना नहीं बल्कि उनका सर्वांगीण विकास सुनिश्चित करना है।
इस अभियान को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला एवं बाल विकास विभाग मिलकर काम करेंगे जहाँ मोबाइल हेल्थ टीमें स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों का नियमित परीक्षण करेंगी। ये केंद्र न केवल जांच के स्थल होंगे बल्कि स्वास्थ्य जागरूकता फैलाने के मुख्य स्तंभ भी बनेंगे जिससे योजना का लाभ हर तबके के बच्चों तक सुगमता से पहुंच सके।

