अम्बिकापुर:
सरगुजा जिले में मौसम का मिजाज बदलने से आगामी 4 नवंबर तक आसमान में घने बादल छाए रहने और रुक-रुक कर बारिश होने का पूर्वानुमान जारी किया गया है। कृषि मौसम विज्ञान इकाई (एएमएफयू), अम्बिकापुर के अनुसार, इस दौरान क्षेत्र में प्रतिदिन 10 से 15 मिलीमीटर तक वर्षा दर्ज हो सकती है, जबकि अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 19 से 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने की संभावना है। वैज्ञानिकों ने विशेष चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि 31 अक्टूबर, 1 नवंबर और 3 नवंबर को गरज-चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने तथा 3 नवंबर को तेज झोंकेदार हवाएं चलने की प्रबल आशंका है, जिससे जनजीवन और कृषि कार्यों पर सीधा असर पड़ सकता है।
मौसम के इस बदले रुख को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को कटी हुई धान की फसल और खलिहानों में रखी अन्य कृषि उपजों को लेकर अत्यधिक सतर्कता बरतने की सलाह दी है। किसानों से अपील की गई है कि कटी हुई फसल को खुले खेतों में बिल्कुल न छोड़ें और उसे तत्काल सुरक्षित, सूखे व ढके हुए स्थानों पर पहुंचाएं। वर्षा के दौरान कटाई, मिंजाई और अनाज सुखाने जैसे कार्य पूरी तरह स्थगित रखें तथा अनाज को भीगने से बचाने के लिए वाटरप्रूफ तिरपाल का पुख्ता प्रबंध करें। इसके अलावा खेतों में जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए जल निकासी की नालियां तत्काल दुरुस्त की जाएं, ताकि पककर तैयार खड़ी धान की फसल को तेज हवाओं और पानी के भराव से गिरने या सड़ने से बचाया जा सके।
मौसम की अतिरिक्त नमी के कारण सब्जियों, दलहनी और तिलहनी फसलों में फफूंदजनित रोगों का प्रकोप तेजी से बढ़ने की आशंका जताई गई है। इसके लिए किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने और कीट या रोग के शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही विशेषज्ञों की अनुशंसित दवाओं का छिड़काव करने के निर्देश दिए गए हैं। तेज हवाओं और ओलावृष्टि की स्थिति में बागवानी फसलों के फूलों, कोमल शाखाओं और फलों के झड़ने का भी खतरा है। इसके साथ ही पशुपालकों को सलाह दी गई है कि वे अपने पशुधन को भीगने से बचाएं और उन्हें किसी सूखे, पक्के व ढके हुए आश्रय स्थल पर बांधकर स्वच्छ पेयजल व सूखे चारे का प्रबंध करें।
कृषि मौसम विज्ञान इकाई ने किसानों और ग्रामीणों से आकाशीय बिजली व वज्रपात से जानमाल की सुरक्षा सुनिश्चित करने का कड़ा आग्रह किया है। अधिकारियों ने कहा है कि बादल गरजने और आकाशीय बिजली चमकने की स्थिति में खुले खेतों में कार्य तत्काल रोक दें और पास के किसी पक्के मकान या सुरक्षित शेड में शरण लें। आंधी और बारिश के दौरान अकेले खड़े ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों, ट्रांसफार्मर या कच्चे खुले शेड के नीचे खड़े होने से बचें। प्रतिकूल मौसम को ध्यान में रखकर ही कृषि कार्यों की दैनिक योजना बनाएं, ताकि फसलों और मेहनत की उपज को संभावित नुकसान से सुरक्षित रखा जा सके।


