बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव का क्षेत्र अब बेहद तेजी से मजबूत हो रहा है और मौसम विभाग के अनुसार इसके अगले 12 से 18 घंटों के भीतर एक भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील होने की प्रबल संभावना जताई गई है। इस मौसमी हलचल ने देश के तटीय और मैदानी इलाकों में चिंता बढ़ा दी है, जिसके चलते सुरक्षा और बचाव की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई हैं।
यह शक्तिशाली मौसमी सिस्टम लगातार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर आगे बढ़ रहा है और इसके आगामी 2 नवंबर की शाम तक आंध्र प्रदेश के तट के पास पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी तक पहुंचने की पूरी आशंका है। मौसम विज्ञानियों का मानना है कि तट के करीब पहुंचते ही इसकी तीव्रता और अधिक बढ़ सकती है, जिससे आसपास के क्षेत्रों में भारी तबाही का खतरा पैदा हो सकता है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इस संभावित चक्रवात के मद्देनजर देश के कुल 20 राज्यों में हल्की से लेकर भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इन प्रभावित क्षेत्रों में नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है क्योंकि कई जगहों पर मौसम का मिजाज काफी खतरनाक हो सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे गंभीर और व्यापक असर आंध्र प्रदेश, ओडिशा और उनसे सटे हुए तटीय इलाकों पर देखने को मिलने वाला है। विशेष रूप से 2 नवंबर को तटीय आंध्र प्रदेश और यनम के कई हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश होने की आशंका है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
चक्रवात के प्रभाव से देश के एक बड़े हिस्से का मौसम बिगड़ने वाला है जिसमें तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम तथा त्रिपुरा राज्य शामिल हैं जहां झमाझम बारिश के साथ ओलावृष्टि की भी चेतावनी दी गई है।
समुद्री इलाकों में इस चक्रवात का रूप बेहद डरावना होने वाला है जहां 1 नवंबर की दोपहर से ही पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी में हवा की रफ्तार 65 से 75 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हवाएं आने वाले घंटों में और भी ज्यादा आक्रामक रूप धारण कर सकती हैं।
खतरे को और बढ़ाते हुए मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 2 नवंबर की सुबह से 3 नवंबर की दोपहर तक हवा की गति 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटे और हवा के तेज झोंकों के दौरान यह रफ्तार 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक भी पहुंच सकती है। इस तरह की तूफानी हवाएं कच्चे मकानों, पेड़ों और बिजली के खंभों को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।
इन डरावनी समुद्री परिस्थितियों को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए बेहद सख्त चेतावनी जारी की है जिसके तहत उन्हें 1 से 4 नवंबर के बीच बंगाल की खाड़ी के प्रभावित हिस्सों और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में समुद्र के भीतर बिल्कुल भी न जाने की हिदायत दी गई है।


