बिलासपुर:
छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण की दिशा में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2016 से लेकर अब तक प्रदेश में 10,775 करोड़ रुपये की कुल लागत से 884 किलोमीटर लंबी 11 महत्वपूर्ण रेल परियोजनाएं सफलतापूर्वक पूरी की जा चुकी हैं। इनमें नई रेल लाइनें, दोहरीकरण, तीसरी रेल लाइन और महत्वपूर्ण रेल फ्लाईओवर शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य में रेल नेटवर्क की लाइन क्षमता में अभूतपूर्व बढ़ोतरी हुई है, जिससे यात्री ट्रेनों के समयपालन में सुधार के साथ-साथ माल परिवहन को भी सीधा संबल मिला है।
व्यस्ततम हावड़ा-मुंबई और कटनी मार्ग पर गति को लगे पंख
बिलासपुर जोन से गुजरने वाला हावड़ा-मुंबई मुख्य रेलमार्ग देश के सबसे व्यस्ततम रेल कॉरिडोर में गिना जाता है। इस रूट पर बिलासपुर-उरकुरा (110 किमी), दुर्ग-राजनांदगांव (31 किमी) और चांपा-झारसुगुड़ा (151 किमी) के बीच तीसरी रेल लाइन बिछने से यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त ट्रैक क्षमता तैयार हुई है।
वहीं छत्तीसगढ़ को उत्तर भारत से जोड़ने वाले बिलासपुर-कटनी मार्ग पर सलका रोड-खोंगसरा (26 किमी) व खोडरी-अनूपपुर (6 किमी) दोहरीकरण तथा पेंड्रा रोड-अनूपपुर (50 किमी) तीसरी लाइन का कार्य भी संपन्न हो चुका है। 11 किलोमीटर लंबे बिलासपुर-उसलापुर रेल फ्लाईओवर के चालू होने से कटनी दिशा की ट्रेनें बिलासपुर के मुख्य मार्ग को बिना बाधित किए सुगमता से निकल रही हैं, जिससे ट्रेनों का आउटर पर अनावश्यक ठहराव बंद हो गया है। इसके अलावा 203 किलोमीटर लंबे रायपुर-टिटलागढ़ दोहरीकरण ने ओडिशा और पूर्वी तटीय बंदरगाहों से छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी को रफ्तार दी है।
सुदूर वनांचलों और बस्तर तक पहुंची छुक-छुक
नई रेल परियोजनाओं के माध्यम से उन क्षेत्रों को पहली बार रेल मानचित्र पर लाया गया है, जो दशकों से संपर्क विहीन थे:
-
बस्तर को बड़ी सौगात: दल्लीराजहरा-रावघाट (95 किमी) नई लाइन के पूर्ण होने के साथ ही 20 अक्टूबर 2026 से रायपुर से रावघाट तक नियमित यात्री ट्रेन सेवा शुरू कर दी गई है। इससे बस्तर अंचल के अंदरूनी क्षेत्रों के नागरिकों को पहली बार सीधी यात्री रेल सेवा मिली है।
-
मांड क्षेत्र जुड़ा: खरसिया-धरमजयगढ़ (124.76 किमी) नई लाइन से रायगढ़ जिले का कोयला समृद्ध मांड क्षेत्र रेल नेटवर्क से जुड़ गया है।
-
नवा रायपुर अटल नगर: मंदिर हसौद-नया रायपुर-केंद्री (20 किमी) नई रेल लाइन के जरिए प्रदेश की नई प्रशासनिक राजधानी नवा रायपुर अटल नगर अब सीधे मुख्य रेल ग्रिड का हिस्सा बन चुकी है।
पूरी हो चुकी 11 प्रमुख रेल परियोजनाओं का ब्योरा
| क्र. | परियोजना का नाम | परियोजना का प्रकार | लंबाई (किमी) |
| 1 | बिलासपुर-उरकुरा | तीसरी लाइन | 110 |
| 2 | सलका रोड-खोंगसरा | दोहरीकरण | 26 |
| 3 | दुर्ग-राजनांदगांव | तीसरी लाइन | 31 |
| 4 | खोडरी-अनूपपुर | दोहरीकरण | 6 |
| 5 | चांपा-झारसुगुड़ा | तीसरी लाइन | 151 |
| 6 | पेंड्रा रोड-अनूपपुर | तीसरी लाइन | 50 |
| 7 | खरसिया-धरमजयगढ़ | नई लाइन | 124.76 |
| 8 | बिलासपुर-उसलापुर | रेल फ्लाईओवर | 11 |
| 9 | रायपुर-टिटलागढ़ | दोहरीकरण | 203 |
| 10 | मंदिर हसौद-नया रायपुर-केंद्री | नई लाइन | 20 |
| 11 | दल्लीराजहरा-रावघाट | नई लाइन | 95 |
| कुल योग | 884 किमी |
2026-27 के लिए ₹7,470 करोड़ का ऐतिहासिक बजट, 32 स्टेशनों का कायाकल्प
प्रदेश में रेल विकास की रफ्तार को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में छत्तीसगढ़ की रेल परियोजनाओं के लिए रिकॉर्ड 7,470 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जो वर्ष 2009 से 2014 के औसत वार्षिक बजट से 24 गुना से भी अधिक है। इसके अलावा ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों को विश्वस्तरीय यात्री सुविधाओं से लैस कर आधुनिक स्वरूप दिया जा रहा है। साथ ही शत-प्रतिशत ब्रॉड गेज विद्युतीकरण के चलते यह पूरा नेटवर्क पर्यावरण के अनुकूल हरित परिवहन को बढ़ावा दे रहा है।
“छत्तीसगढ़ में पिछले वर्षों में पूर्ण हुई ये परियोजनाएं राज्य के औद्योगिक और सामाजिक विकास की मजबूत आधारशिला हैं। इनसे ट्रेनों का परिचालन समयबद्ध हुआ है और सुदूर अंचलों तक कनेक्टिविटी पहुंची है। रेलवे प्रदेश के यात्रियों, किसानों, व्यापारियों और खनिज आधारित उद्योगों को विश्वस्तरीय सेवाएं देने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।”— शेख समी उर रहमान, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (CPRO), दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, बिलासपुर


