नई दिल्ली:
विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) में फर्जी हाजिरी और मजदूरी के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा डिजिटल कदम उठाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) का नया और उन्नत संस्करण पेश किया है। आईआईटी मद्रास और प्रमुख तकनीकी एजेंसियों के सहयोग से विकसित इस ऐप को राज्यों में भी जल्द लागू किया जाएगा, जिससे योजना के तहत काम करने वाले वास्तविक श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और शत-प्रतिशत पारदर्शिता सुनिश्चित हो सकेगी।
फर्जी फोटो से नहीं लगेगी हाजिरी: AI और लाइवनेस डिटेक्शन से लैस प्रणाली
ग्रामीण रोजगार स्थलों पर फर्जी उपस्थिति दर्ज कराने और अनुपस्थित लोगों के नाम पर राशि निकालने की शिकायतों को देखते हुए नए ऐप में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं:
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लाइवनेस डिटेक्शन: अब किसी पुरानी फोटो, पोस्टर या डमी तस्वीर के माध्यम से हाजिरी नहीं लगाई जा सकेगी। सिस्टम यह जांचेगा कि कैमरे के सामने वास्तविक और जीवित श्रमिक ही मौजूद है।
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एआई चेहरा सत्यापन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक के जरिए प्रत्येक श्रमिक के चेहरे का डेटाबेस से सटीक मिलान किया जाएगा।
नेटवर्क न होने पर भी दर्ज होगी उपस्थिति, बुजुर्गों को विशेष राहत
ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या को ध्यान में रखते हुए ऐप में तकनीकी लचीलापन दिया गया है:
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ऑफलाइन मोड: नेटवर्क विहीन क्षेत्रों में भी मेट या पर्यवेक्षक ऑफलाइन माध्यम से श्रमिकों की हाजिरी दर्ज कर सकेंगे। जैसे ही डिवाइस नेटवर्क क्षेत्र में आएगी, डेटा स्वतः मुख्य सर्वर पर अपलोड हो जाएगा।
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दिव्यांगों और बुजुर्गों के लिए छूट: वृद्ध और दिव्यांग श्रमिकों के लिए बायोमेट्रिक या तकनीकी जटिलताओं से बचने हेतु मानवीय आधार पर वैकल्पिक व्यवस्था का प्रावधान रखा गया है।
ई-एमबी और AI जांच के बाद ही जारी होगा भुगतान
मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐप पर केवल उपस्थिति दर्ज होने मात्र से मजदूरी का भुगतान नहीं होगा। हाजिरी दर्ज होने के बाद सिस्टम द्वारा एआई फोटो डुप्लीकेशन प्रणाली के तहत दोहराव की जांच की जाएगी। इसके साथ ही इलेक्ट्रॉनिक मेजरमेंट बुक (e-MB) के माध्यम से मौके पर किए गए वास्तविक कार्य के माप का मिलान होगा। दोनों प्रक्रियाओं के सफल सत्यापन के बाद ही डीबीटी (DBT) के जरिए श्रमिकों के खातों में मजदूरी अंतरित की जाएगी। इस कदम से सरकारी धन के दुरुपयोग पर पूरी तरह रोक लगेगी।


