पटना:
बिहार के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में 1 नवंबर से मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे मील) का संचालन पूरी तरह ठप हो सकता है। स्कूलों को बीते पांच से छह महीनों से योजना की राशि का आवंटन नहीं मिला है, जिसके विरोध में बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। संघ ने शिक्षा विभाग को लिखित अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर बकाया राशि का भुगतान और आगे के संचालन के लिए पर्याप्त फंड जारी नहीं किया गया, तो पूरे प्रदेश में योजना को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया जाएगा।
जेब से पैसे लगाकर कब तक खिलाएं खाना?
बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ के अनुसार, पिछले 5-6 माह से बजट न मिलने के बावजूद शिक्षक अपनी जेब से पैसे खर्च कर बच्चों को दोपहर का भोजन उपलब्ध करा रहे थे। अब स्थिति आर्थिक रूप से असहनीय हो चुकी है।
संघ के अध्यक्ष जयराम शर्मा ने कहा कि शिक्षक अब तक बच्चों के हित में अपनी जेब से खर्च उठा रहे थे, लेकिन अब शिक्षकों के लिए अपने स्तर से इस भारी खर्च को वहन करना नामुमकिन हो गया है। सरकार जब तक फंड नहीं देती, तब तक भोजन बनवाना संभव नहीं होगा। संघ के महासचिव दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि इससे पूर्व 1 अक्टूबर को भी पत्रांक 150 के जरिए मध्याह्न भोजन निदेशक को ज्ञापन सौंपकर समस्या के समाधान की गुहार लगाई गई थी। विभाग की ओर से कोई ठोस पहल न होने के कारण अब एक सप्ताह का अंतिम समय दिया गया है। भुगतान न होने पर आंदोलन के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
लाखों स्कूली बच्चों पर पड़ेगा सीधा असर
संघ के प्रदेश सचिव आनंद मिश्रा ने चिंता जताते हुए कहा कि यदि 1 नवंबर से मध्याह्न भोजन बंद होता है, तो इसका सीधा असर राज्य के लाखों मासूम और गरीब परिवारों से आने वाले बच्चों पर पड़ेगा। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले वंचित तबके के बच्चों के लिए स्कूल में मिलने वाला यह भोजन उनके दैनिक पोषण का सबसे बड़ा जरिया है। ऐसे में योजना रुकने से बच्चों की उपस्थिति और सेहत दोनों प्रभावित होंगी।
अब सबकी नजरें शिक्षा विभाग के कदम पर टिकी हैं कि क्या सरकार अल्टीमेटम की अवधि खत्म होने से पहले बकाया राशि जारी कर स्कूलों में चूल्हे बुझने से बचा पाती है या नहीं।


