नवंबर में छुट्टियों की भरमार: दिवाली, छठ और गुरु नानक जयंती पर बंद रहेंगे स्कूल
रायपुर:
खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान उपार्जन को लेकर राज्य सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लिया है। समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए अब किसानों को उपार्जन केंद्रों (सोसायटियों) में घंटों लंबी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं पड़ेगी। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने पिछले वर्ष की तरह इस बार भी ‘तुंहर टोकन’ मोबाइल ऐप के जरिए ऑनलाइन टोकन व्यवस्था को पूरी तरह लागू रखा है। इस व्यवस्था से किसान अपनी सुविधानुसार घर बैठे किसी भी समय 24×7 टोकन प्राप्त कर सकेंगे।
फ्लिपकार्ट की ‘Big Bang Diwali Sale’ शुरू , बंपर छूट, बैंक ऑफर्स के साथ 80% तक बचत का मौका
गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है ऐप
खाद्य विभाग द्वारा संचालित ‘तुंहर टोकन’ ऐप को किसान सीधे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते हैं। किसान अपनी सुविधानुसार तारीख और समय का चयन कर धान बिक्री के लिए टोकन लॉक कर सकेंगे। इससे न केवल किसानों के समय और श्रम की बचत होगी, बल्कि सोसायटियों में अनावश्यक भीड़ और अव्यवस्था पर भी पूरी तरह लगाम लगेगी।
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल: परीक्षा कार्यों से जुड़े केंद्राध्यक्षों, शिक्षकों और कर्मचारियों के मानदेय में वृद्धि, आदेश जारी
जमीन के रकबे के आधार पर मिलेंगे टोकन
धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए शासन ने जोत के रकबे के हिसाब से टोकन की संख्या तय की है:
-
2 एकड़ तक के किसान: लघु एवं सीमांत किसानों को अधिकतम 1 टोकन जारी होगा।
-
2 से 10 एकड़ तक के किसान: मध्यम श्रेणी के किसानों को अधिकतम 2 टोकन प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी।
-
10 एकड़ से अधिक रकबे वाले किसान: बड़े किसानों को धान बेचने के लिए अधिकतम 3 टोकन दिए जाएंगे।
मोबाइल छोड़िए, किताब उठाइए.. रात में दूरस्थ छात्रावास पहुँचीं कलेक्टर, छात्राओं से हिंदी-अंग्रेजी की किताबें पढ़वाकर परखा पठन कौशल
कम धान बेचने पर शेष पात्रता नहीं होगी लैप्स
किसानों की सबसे बड़ी सहूलियत यह रखी गई है कि टोकन लेते समय वे अपनी आवश्यकता और उपलब्ध धान की मात्रा स्वयं दर्ज कर सकेंगे।
-
यदि कोई किसान पहले टोकन में अपनी कुल पात्रता का पूरा धान नहीं बेच पाता है, तो उसकी शेष बची पात्रता (रकबा) निरस्त या लैप्स नहीं होगी।
-
किसान अपनी पात्रतानुसार बचा हुआ शेष धान अपने दूसरे अथवा तीसरे टोकन के जरिए आसानी से बेच सकेगा।
शासन की इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य उपार्जन केंद्रों पर बिचौलियों के दखल को समाप्त करना और किसानों को अपनी उपज का सही समय पर सुविधाजनक तरीके से विक्रय करने का विकल्प देना है।


