आज हो सकती है DA-DR में बढ़ोतरी की घोषणा,
दिल्ली हाईकोर्ट की केंद्र को कड़ी फटकार, CAT का फैसला रखा बरकरार
नई दिल्ली:
दिल्ली हाईकोर्ट ने रिटायर्ड कर्मचारियों के पेंशन और वित्तीय लाभों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में केंद्र सरकार को सख्त हिदायत दी है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि जीवन भर सेवा देने के बाद बुजुर्ग कर्मचारियों को अपनी ही पेंशन और हक के लिए अदालतों के चक्कर नहीं काटने चाहिए। पात्र कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान और पेंशन का वाजिब लाभ सुनिश्चित करना पूरी तरह सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।
जस्टिस सी. हरि शंकर और जस्टिस विनोद कुमार की खंडपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के आदेश को बरकरार रखते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही अदालत ने आयकर विभाग के रिटायर्ड असिस्टेंट डायरेक्टर राम अवतार के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें संशोधित वेतनमान और पेंशन का बकाया लाभ देने का आदेश दिया।
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केंद्र की ‘देरी वाली दलील’ को अदालत ने नकारा
राम अवतार ने व्यय विभाग के 11 फरवरी 2003 के आधिकारिक ज्ञापन के आधार पर अपना वेतन दोबारा तय करने की मांग की थी। वे केंद्रीय सचिवालय के समकक्ष पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के बराबर वेतनमान चाहते थे। केंद्र सरकार ने यह दलील देते हुए राहत का विरोध किया कि कर्मचारी ने अपनी सेवानिवृत्ति के करीब 14 साल बाद यह मांग उठाई है, इसलिए अगर कोई बकाया बनता भी है तो वित्तीय भुगतान आवेदन करने से पूर्व के केवल 3 वर्षों तक ही सीमित रखा जाना चाहिए।
हाईकोर्ट ने केंद्र की इस दलील को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि वेतन और पेंशन का गलत निर्धारण कोई एक दिन की भूल नहीं, बल्कि लगातार जारी रहने वाला अन्याय है। किसी कर्मचारी को केवल इस आधार पर लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता कि वह पहले चली कानूनी लड़ाइयों का हिस्सा नहीं था, क्योंकि ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 14 में दिए गए समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने यह भी माना कि उम्रदराज और सेवानिवृत्त कर्मियों को अक्सर सभी कानूनी और प्रशासनिक बदलावों की समय पर जानकारी नहीं होती।
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3 महीने के भीतर एरियर भुगतान का अल्टीमेटम
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि राम अवतार का वेतन 1 जनवरी 1996 से कागजी तौर पर संशोधित किया जाए और उन्हें वास्तविक वित्तीय लाभ 11 फरवरी 2003 की तारीख से प्रदान किया जाए। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि नए वेतनमान के अनुसार उनकी पेंशन की नए सिरे से गणना की जाए और समस्त बकाया राशि का भुगतान तीन महीने के भीतर सुनिश्चित किया जाए।


