एससीईआरटी ने शुरू की कवायद, कक्षावार पाठ्यक्रम और अध्यापन व्यवस्था पर मंथन; अंतिम फैसला शासन स्तर पर होगा
रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा को अब स्कूलों में केवल स्थानीय भाषा के तौर पर नहीं, बल्कि स्वतंत्र विषय के रूप में पढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने आगामी शैक्षणिक सत्र से प्राथमिक से लेकर हायर सेकेंडरी तक छत्तीसगढ़ी को सभी कक्षाओं में स्वतंत्र विषय के रूप में शामिल करने की दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, इसके क्रियान्वयन पर अंतिम निर्णय शासन स्तर से लिया जाएगा।
इसी सिलसिले में शंकर नगर स्थित एससीईआरटी में अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों की बैठक हुई। बैठक में छत्तीसगढ़ी के लिए कक्षावार पाठ्यक्रम तैयार करने, अध्यापन की रूपरेखा तय करने और स्कूलों में इसे लागू करने समेत कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने पाठ्यक्रम और अन्य तैयारियों की प्रक्रिया जल्द पूरी करने पर जोर दिया।
बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त संचालक जेपी रथ, उप सचिव बी. रघु, पद्मश्री महेंद्र मिश्रा, सुशील राठौर, डेगेश्वर वर्मा, राजीव गुप्ता, यशवंत चतुर्वेदी सहित अन्य अधिकारी और प्राचार्य मौजूद रहे।
अभी तीन भाषाओं की व्यवस्था, अब स्वतंत्र विषय की तैयारी
नई शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत प्रदेश में बच्चों को शुरुआती कक्षाओं से ही स्थानीय भाषा और संस्कृति से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ी समेत प्रदेश की 18 स्थानीय बोली-भाषाओं में पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।
वर्तमान व्यवस्था के तहत कक्षा पहली से तीसरी तक हिंदी के साथ छत्तीसगढ़ी और स्थानीय भाषा को पाठ के अनुसार त्रिभाषीय व्यवस्था में शामिल किया गया है। वहीं, कक्षा चौथी और पांचवीं में हिंदी के साथ विद्यार्थियों के क्षेत्र के अनुसार स्थानीय बोली-भाषा को जोड़ा गया है।
अब एससीईआरटी इस व्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ी को कक्षा पहली से 12वीं तक स्वतंत्र विषय के रूप में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए अलग-अलग कक्षाओं के स्तर के अनुरूप पाठ्यक्रम और अध्यापन सामग्री तैयार करने पर काम किया जाएगा।
18 बोली-भाषाओं को भी मिल रहा बढ़ावा
प्रदेश में भाषाई विविधता को देखते हुए छत्तीसगढ़ी के अलावा सरगुजिहा, हल्बी, सादरी, गोंडी, कुड़ुख समेत 18 स्थानीय बोली-भाषाओं को शुरुआती शिक्षा से जोड़ने की पहल की गई है। इसका उद्देश्य बच्चों को उनकी मातृभाषा और स्थानीय परिवेश से जोड़ते हुए सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।
छत्तीसगढ़ी को स्वतंत्र विषय बनाए जाने की स्थिति में प्रदेश की भाषा, लोक संस्कृति, परंपरा और साहित्य को स्कूली पाठ्यक्रम में अधिक व्यापक स्थान मिलने की उम्मीद है। फिलहाल एससीईआरटी स्तर पर तैयारी चल रही है और अंतिम निर्णय शासन की स्वीकृति के बाद होगा। :::























