जशपुर बना नाशपाती लोक, तीन राज्यों का प्रवेश द्वार अब किसानों के लिए बना समृद्धि का रास्ता

रायपुर, 5 जुलाई 2026

​छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित ‘चिंतन शिविर 3.0’ प्रदेश की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इसे विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण नीतिगत कदम बताया है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इसे महज एक ‘मनोरंजक नौटंकी’ करार दिया है।

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सत्ता पक्ष: ‘सुशासन और नवाचार का महामंथन’

​आईआईएम रायपुर में आयोजित इस दो दिवसीय शिविर में मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद के सदस्यों और देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने शासन-प्रशासन के आधुनिकीकरण पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस शिविर का मूल उद्देश्य राज्य को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और जनहितैषी बनाना है।

प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने शिविर को संबोधित करते हुए नेतृत्व की परिभाषा को केवल प्रशासनिक शक्ति तक सीमित न रखकर इसे ‘मूल्य-आधारित’ बनाने पर जोर दिया। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए भावनात्मक संतुलन (Emotional Balance) को अत्यंत आवश्यक बताया। उनके अनुसार, सुशासन तभी संभव है जब प्रशासन में ‘सेवा-भाव’ हो और अधिकारी जनता की समस्याओं के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होकर कार्य करें। यह सत्र एक ऐसे नेतृत्व को विकसित करने पर केंद्रित था जो जन-सरोकारों से गहराई से जुड़ा हो।

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नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने शासन व्यवस्था को आधुनिक युग के अनुरूप ढालने का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), 5जी, ड्रोन तकनीक, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और ब्लॉकचेन के उपयोग को अनिवार्य बताया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य ‘डेटा-आधारित प्रशासन’ (Data-driven Governance) को अपनाना है, जिससे नागरिकों तक सरकारी सेवाएं बिना किसी देरी के पहुंच सकें। यह तकनीक-आधारित दृष्टिकोण शासन को न केवल दक्ष और पारदर्शी बनाएगा, बल्कि भविष्य की डिजिटल चुनौतियों का सामना करने में छत्तीसगढ़ को सक्षम बनाएगा।

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कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने राज्य की रीढ़ ‘कृषि क्षेत्र’ को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने पर विस्तृत चर्चा की। इस सत्र में जलवायु अनुकूल कृषि और फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को प्राथमिकता दी गई। विशेषज्ञों ने न केवल प्राकृतिक खेती के महत्व को समझाया, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए मूल्य संवर्धन (Value Addition) और सीधे बाजार से संपर्क साधने (Market Linkage) के व्यावहारिक तरीके भी बताए। लक्ष्य यह है कि कृषि केवल एक आजीविका न रहकर एक लाभप्रद व्यावसायिक मॉडल में बदल जाए।

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मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस बात को रेखांकित किया कि ‘चिंतन शिविर’ केवल चर्चा का केंद्र नहीं, बल्कि परिणामों का वाहक है। पिछले शिविरों की सफलता को आधार बनाते हुए उन्होंने बताया कि: इससे फाइलों का निपटारा अब डिजिटल और समयबद्ध तरीके से होता है, जिससे प्रशासनिक कार्यशैली में गति आई है आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान हेतु यह एक प्रभावी माध्यम साबित हुई है। यह वर्तमान में सबसे सफल नवाचारों में से एक है, जिसके माध्यम से 36 सरकारी विभागों की 520 से अधिक सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इससे नागरिकों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली है और पारदर्शिता सुनिश्चित हुई है।

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने इस चिंतन शिविर को महज एक ‘मनोरंजक नौटंकी’ करार दिया है। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले ढाई वर्षों के शासनकाल में सरकार ने कोई भी बड़ा विकास कार्य पूरा नहीं किया है, जिससे राज्य में हर वर्ग—युवा, किसान और महिलाएं—निराश हैं। बैज ने कटाक्ष करते हुए कहा कि जब सरकार ने पूरा कार्यकाल ‘गुड़-गोबर’ कर दिया है, तो अब शिविर आयोजित कर सरकार चलाने के गुण सीखना केवल अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने का एक विफल प्रयास है।

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​कांग्रेस ने इस आयोजन को सरकार की अलोकप्रियता से उपजी हताशा का परिणाम बताया है। पार्टी का मानना है कि राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है और जनता इस ‘जन-विरोधी’ सरकार से जल्द से जल्द छुटकारा पाने का मन बना चुकी है। कांग्रेस ने दावा किया कि यह सरकारी इवेंट केवल ध्यान भटकाने के लिए है और असल में सरकार अब ‘फेयरवेल’ (विदाई) की तैयारी कर रही है, जिसमें नेतृत्व परिवर्तन तक की चर्चाएं जोरों पर हैं।

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