केंद्र सरकार 10 साल बाद बढ़ाएगी आर्थिक मदद, विशेष थानों के लिए भी मिलेगा फंड
विशेष रिपोर्ट
नई दिल्ली। केंद्र सरकार अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के खिलाफ होने वाले उत्पीड़न के मामलों में दी जाने वाली मुआवजा राशि में 40 प्रतिशत तक की बड़ी बढ़ोतरी करने की तैयारी कर रही है। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) में हुई वृद्धि को आधार बनाते हुए केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने यह प्रस्ताव तैयार कर वित्त मंत्रालय की व्यय समिति के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है।
वर्ष 2016 के बाद यानी पूरे एक दशक बाद मोदी सरकार इस मुआवजा राशि में संशोधन करने जा रही है। इसके साथ ही एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्यों में विशेष पुलिस थानों और अदालतों के गठन हेतु विशेष अनुदान देने की योजना पर भी काम चल रहा है।
अब 1 लाख से 12 लाख रुपये तक मिलेगा मुआवजा
वर्तमान व्यवस्था के तहत अपराध की प्रकृति और उसकी गंभीरता के आधार पर पीड़ितों को 85,000 रुपये से लेकर 8.25 लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है।
नये प्रस्ताव के तहत इस सीमा में 40 फीसदी का इजाफा किया जा रहा है:
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न्यूनतम सहायता: अब न्यूनतम मुआवजा राशि बढ़ाकर 1 लाख रुपये की जाएगी।
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अधिकतम सहायता: गंभीर अपराधों के मामलों में अधिकतम मुआवजा 12 लाख रुपये तक मिलेगा।
विशेष थानों के लिए राज्यों को एकमुश्त ₹5 लाख की मदद
कानून के तहत एससी/एसटी वर्ग के मामलों की त्वरित सुनवाई और जांच के लिए विशेष थानों का प्रावधान है। केंद्र सरकार अब राज्यों को ऐसे विशेष थानों की स्थापना के लिए 5 लाख रुपये की एकमुश्त (One-time) वित्तीय सहायता देने पर विचार कर रही है। हालांकि, थानों के आगे के संचालन और रखरखाव का खर्च संबंधित राज्य सरकारों को ही उठाना होगा।
हाल ही में संसद के बजट सत्र के दौरान सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की स्टैंडिंग कमेटी ने चिंता व्यक्त की थी कि केंद्रीय सहायता मिलने के बावजूद कई राज्यों ने इस कानून के अमल के लिए पर्याप्त प्रशासनिक मशीनरी तैयार नहीं की है।
देश भर में 181 विशेष थाने, UP-राजस्थान में एक भी नहीं
संसद में पेश सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में देश भर में केवल 181 विशेष एससी/एसटी पुलिस थाने ही संचालित हो रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि देश में केवल 7 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ही ऐसे समर्पित थाने स्थापित किए गए हैं।
प्रमुख राज्यों में विशेष थानों की स्थिति:
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मध्य प्रदेश: 51
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बिहार: 40
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कर्नाटक: 33
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छत्तीसगढ़: 27
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झारखंड: 24
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केरल: 03
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पुडुचेरी: 03
उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में जहाँ एससी-एसटी उत्पीड़न के मामले अत्यधिक दर्ज किए जाते हैं, वहाँ कार्रवाई के लिए एक भी समर्पित (Dedicated) विशेष पुलिस स्टेशन मौजूद नहीं है।
‘क्रीमी लेयर’ पर भी केंद्र का रुख साफ
एससी/एसटी कल्याण के प्रति सरकार का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट किया कि एससी/एसटी आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ व्यवस्था लागू करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकार की दलील है कि इस वर्ग को मिलने वाले आरक्षण का आधार केवल आर्थिक नहीं, बल्कि उनकी ऐतिहासिक, सामाजिक और शैक्षणिक विषमताएं भी हैं।

