उत्तराखंड में सेवारत शिक्षकों के लिए अलग से टीईटी का रास्ता साफ! शिक्षा मंत्री ने दिए निर्देश
उत्तराखंड में सेवारत शिक्षकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश की तर्ज पर अब उत्तराखंड सरकार भी शिक्षकों के लिए विशेष अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) कराने पर विचार कर रही है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने अधिकारियों को इस पूरे मामले का बारीकी से अध्ययन कर जल्द से जल्द प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
शिक्षकों की चिंता और उम्र का दायरा:
विभाग में अधिसूचना से पहले नियुक्त हुए कई शिक्षकों की आयु अब 53 से 54 वर्ष तक पहुंच चुकी है। इस उम्र में अचानक टीईटी परीक्षा अनिवार्य होने से शिक्षकों के समक्ष पदोन्नति रुकने और नौकरी पर संकट आने का खतरा मंडरा रहा था।
शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय जो सेवा शर्तें निर्धारित थीं, उन्हें पूरा करने के बाद ही उनका चयन हुआ था। ऐसे में इस उम्र में टीईटी परीक्षा पास करना उनके साथ अन्याय है। उन्होंने मांग की थी कि या तो उन्हें इस से छूट दी जाए या उनके लिए विशेष परीक्षा का आयोजन हो।
उत्तर प्रदेश की तर्ज पर तैयारी:
सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षकों को राहत देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘विशेष अध्यापक पात्रता परीक्षा’ कराने का निर्णय लिया है। इसी तर्ज पर उत्तराखंड सरकार भी कदम उठाने जा रही है।
शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने स्पष्ट किया है कि 17 और 18 अगस्त को इस संबंध में शिक्षकों और अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई है।
उत्तराखंड बोर्ड के सचिव विनोद ढौंढियाल ने बताया कि शासनादेश जारी होने के बाद ही शिक्षकों के लिए अलग से टीईटी परीक्षा आयोजित की जा सकेगी।
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शिक्षक हित को सर्वोपरि रखते हुए सरकार इस पर सकारात्मक निर्णय लेने की तैयारी में है।

