रांची (झारखंड): राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में गंभीर मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और बुनियादी सुविधाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी की अध्यक्षता में आयोजित रिम्स शासी परिषद की बैठक में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करने के लिए 200 नए अत्याधुनिक वेंटिलेटर खरीदने का फैसला लिया गया है। इस बैठक में इमरजेंसी और ट्रामा की स्थिति से निपटने, कैंसर जांच से जुड़े लंबित उपकरणों की त्वरित खरीद करने और ऑन्कोलॉजी विभाग के लिए रेडियोथेरेपी मशीनों की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया गया, ताकि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर सही उपचार मिल सके।
मरीजों के स्वास्थ्य और अस्पताल की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने के साथ-साथ इस बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं को भी स्वीकृति दी गई। रिम्स में थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों के लिए रक्त की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने, ब्लड बैंक को और अधिक मजबूत बनाने और जेनेटिक स्क्रीनिंग की बेहतर व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति बनी है। इसके अलावा, एक समर्पित रिहैबिलिटेशन सेंटर (पुनर्वास केंद्र) स्थापित करने और अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी की तकनीक शुरू करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्णय लिया गया। रोबोटिक सर्जरी शुरू होने से जटिल ऑपरेशनों को अधिक सटीकता के साथ अंजाम दिया जा सकेगा, जिससे मरीजों का ब्लड लॉस कम होगा और वे जल्द ठीक हो सकेंगे।
अस्पताल के बुनियादी ढांचे और चिकित्सा शिक्षा में भी बड़े बदलाव की तैयारी की गई है। रिम्स के सभी यूजी और पीजी छात्रावासों का संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल पर किया जाएगा ताकि छात्रों को बेहतर आवासीय सुविधाएं मिल सकें। इसके साथ ही एमबीबीएस और पीजी के छात्रों को तकनीक आधारित शिक्षा देने के लिए हाई-टेक स्मार्ट क्लासरूम तैयार किए जाएंगे। वहीं एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़कर 250 होने के बाद आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार के लिए तकनीकी आकलन कराने के भी निर्देश दिए गए हैं।
अस्पताल परिसर के सौंदर्यशास्त्र और सुविधाओं को नया रूप देने के लिए शासी परिषद ने व्यापक योजना बनाई है। रिम्स के मुख्य प्रवेश द्वार को मॉडर्न लुक देने, ऑर्थोपेडिक वार्ड का पुनर्निर्माण करने और मरीजों तथा उनके परिजनों की आसानी के लिए हाई-टेक हेल्प डेस्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। सबसे बड़ा बदलाव अस्पताल के स्वच्छता ढांचे में देखने को मिलेगा, जहाँ रिम्स परिसर के सभी शौचालयों को आधुनिक बनाते हुए एयरपोर्ट की तर्ज पर उनका निर्माण कराया जाएगा। शासी परिषद के इन फैसलों से न केवल झारखंड के मरीजों को विश्वस्तरीय इलाज मिलेगा, बल्कि रिम्स का पूरा माहौल अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनेगा।

