रायपुर:
छत्तीसगढ़ के आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में पदस्थ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसरों (CHO) को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। ड्यूटी से गायब रहने और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज न कराने के बावजूद हर महीने करोड़ों रुपये की प्रोत्साहन राशि बांटे जाने की शिकायतों के बाद राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) ने कड़ा रुख अपनाया है। एनएचएम के अपर संचालक ने प्रदेश के सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को जांच कर विस्तृत प्रतिवेदन तलब किया है।
मानदेय और इंसेंटिव का गणित
| मद | निर्धारित राशि / कार्य |
| मासिक मानदेय | ₹16,500 प्रति माह (नियमित) |
| प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव) | ₹5,000 से ₹15,000 प्रति माह (कार्य आधारित) |
| जिम्मेदारियां | कैंसर, टीबी, कुष्ठ, एनसीडी स्क्रीनिंग और गर्भवती महिलाओं की देखभाल सहित 12 अनिवार्य स्वास्थ्य सेवाएं |
| जांच का दायरा | फर्जी उपस्थिति, कागजों पर टारगेट पूरा दिखाना और अवैध भुगतान |
क्या हैं मुख्य आरोप?
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मुख्यालय से नदारद और अनुपस्थिति: शिकायतों के अनुसार, कई सीएचओ अपने निर्धारित मुख्यालय में निवास नहीं कर रहे हैं और नियमित ड्यूटी से गायब रहते हैं।
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ऑनलाइन हाजिरी में खेल: विभाग की बायोमीट्रिक या ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली का पालन किए बिना भी कर्मचारियों का कार्य ‘संतोषजनक’ दर्शाया जा रहा था।
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कागजों पर 12 प्रकार के कार्य: जमीनी स्तर पर स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच किए बिना केवल पोर्टल पर फर्जी आंकड़े दर्ज कर शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करना दिखाया गया।
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अधिकारियों की मिलीभगत का संदेह: सूत्रों के मुताबिक, जिला एवं विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधकों की देखरेख में आंकड़ों की बाजीगरी कर चुनिंदा कर्मचारियों को अधिकतम इंसेंटिव का भुगतान किया जाता रहा।
बेमेतरा से शुरू हुआ मामला, अब पूरे राज्य में जांच
इस गड़बड़ी की शुरुआत बेमेतरा जिले से उजागर हुई थी। वहां कुछ सीएचओ द्वारा फर्जी तरीके से प्रोत्साहन राशि आहरित करने का मामला सामने आने पर वेतन रोकने की कार्रवाई की गई थी। हालांकि, विरोध-प्रदर्शन के बाद उस समय मामला दब गया। अब व्यापक स्तर पर मिली शिकायतों के बाद एनएचएम मुख्यालय ने इसे संगठित वित्तीय अनियमितता मानते हुए पूरे प्रदेश में जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
एनएचएम के अपर संचालक ने सभी सीएमएचओ को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रोत्साहन राशि भुगतान की नियमानुसार जांच की जाए। जिन मामलों में लापरवाही या फर्जीवाड़ा प्रमाणित होता है, वहां तत्काल रिकवरी और दंडात्मक कार्रवाई करते हुए जांच रिपोर्ट राज्य कार्यालय को भेजी जाए।























