जशपुर:
छत्तीसगढ़ के पहाड़ी और वनांचल क्षेत्रों से घिरे जशपुर जिले में सड़क हादसों और उनमें होने वाली अकाल मौतों का सिलसिला प्रशासन और आम जनता के लिए गहरी चिंता का विषय बना हुआ है। विधानसभा पटल पर प्रस्तुत किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2023 से लेकर 15 जून 2026 तक की साढ़े तीन वर्षों की अवधि में जशपुर जिले की सड़कों पर कुल 1,513 सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं。 इन भीषण हादसों में अब तक कुल 1,092 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है, जबकि 714 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जिले के भौगोलिक स्वरूप, घुमावदार रास्तों और तेज रफ्तार के कारण यहां होने वाले हादसों का ग्राफ साल दर साल बदल रहा है, जो सड़क सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी है।
जिले में वर्षवार दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2023 में जशपुर में कुल 353 सड़क हादसे दर्ज किए गए थे, जिनमें 256 लोगों की मौत हुई थी और 179 लोग घायल हुए थे। इसके ठीक अगले साल यानी 2024 में हादसों की संख्या में भारी उछाल आया और यह ग्राफ बढ़कर 461 दुर्घटनाओं तक पहुंच गया, जिसमें 341 लोगों ने अपनी जान गंवाई और 198 लोग जख्मी हुए। साल 2025 में भी स्थिति चिंताजनक बनी रही और जिले में 459 हादसे दर्ज किए गए, जिनमें 311 लोगों की मौत हुई और 208 लोग घायल हुए। साल 2026 के शुरुआती महीनों में यानी 15 जून तक ही जिले की सड़कों पर 240 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 184 लोगों की मौत हो चुकी है और 129 लोग घायल हैं।
सड़कों पर बहते खून और उजड़ते परिवारों के इस सिलसिले को रोकने के लिए जशपुर जिला प्रशासन और पुलिस विभाग द्वारा लगातार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। पुलिस और यातायात विभाग द्वारा जिले के मुख्य मार्गों और संवेदनशील घाटों पर ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्रों) को चिन्हित कर वहां संकेतक बोर्ड, रिफ्लेक्टर और गति अवरोधक लगाने का काम युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। विशेष रूप से अंधाधुंध रफ्तार से चलने वाले भारी वाहनों और शराब पीकर गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ पुलिस द्वारा लगातार चेकिंग अभियान चलाकर दंडात्मक और चालानी कार्रवाई की जा रही है, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नकेल कसी जा सके।
प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ, जिले में आम लोगों की मानसिकता बदलने और उन्हें जागरूक करने के लिए व्यापक स्तर पर जन-जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। यातायात पुलिस द्वारा स्थानीय स्कूलों, कॉलेजों और ग्रामीण हाट-बाजारों में नुक्कड़ नाटकों और कार्यशालाओं के माध्यम से लोगों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट लगाने और रफ ड्राइविंग से बचने के लिए लगातार प्रेरित किया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन निरंतर प्रयासों और त्वरित चिकित्सकीय सहायता (क्विक रिस्पॉन्स) की वजह से कई हादसों को टालने और दर्जनों घायलों की जान बचाने में सफलता भी मिली है। हालांकि, प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि जब तक आम नागरिक खुद अपनी सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार नहीं होंगे, तब तक सड़कों को पूरी तरह सुरक्षित बनाना एक बड़ी चुनौती रहेगा।

