देश में आने वाले समय में नया ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने और उसे रिन्यू कराने की पूरी प्रक्रिया बदलने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने फर्जी लाइसेंस पर रोक लगाने, ड्राइविंग टेस्ट को सख्त करने और आम लोगों को बार-बार आरटीओ के चक्कर काटने से बचाने के उद्देश्य से एक नया ड्राफ्ट जारी किया है। इस मसौदे पर आम जनता और विशेषज्ञों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
नए नियमों के लागू होने के बाद ड्राइविंग लाइसेंस को खास कलर कोडिंग दी जाएगी। भारतीय नागरिकों के लिए केसरिया, पीला और हरा रंग संयोजन वाला लाइसेंस जारी किया जाएगा, जबकि विदेशी नागरिकों के लिए नीला और हरा रंग संयोजन तय किया गया है। नए लाइसेंस चिप वाले न होकर केवल क्यूआर कोड आधारित पीवीसी कार्ड होंगे। इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही पुलिस, परिवहन विभाग या अन्य जांच एजेंसियां चालक का पूरा ब्योरा तुरंत देख सकेंगी। हर कार्ड पर राष्ट्रीयता, मोबाइल नंबर, इमरजेंसी संपर्क व्यक्ति का नाम व नंबर, ब्लड ग्रुप और अंगदान की सहमति से जुड़ा विकल्प स्पष्ट रूप से दर्ज रहेगा।
लाइसेंस बनवाने के दौरान नाम और उम्र से जुड़े फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार ने हलफनामे (एफिडेविट) की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म करने का फैसला किया है। अब उम्र और पते के प्रमाण के तौर पर सिर्फ चुनिंदा पांच आधिकारिक दस्तावेज ही मान्य होंगे, जिनमें आधार, पासपोर्ट, ई-राशन कार्ड, सर्विस आईडी, पेंशन ऑर्डर या पैन कार्ड शामिल हैं। नए नियमों के तहत लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को उम्र के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए अब केवल दो फॉर्म का प्रावधान रखा गया है, जिसमें नए लाइसेंस के लिए फॉर्म नंबर-2 और रिन्यूअल या डुप्लीकेट कार्ड के लिए फॉर्म-2ए भरना होगा। अगर कोई व्यक्ति ऑनलाइन आधार प्रमाणीकरण के जरिए वाहन श्रेणी जोड़ने, पता बदलने या नाम में सुधार जैसे बदलाव करता है, तो उससे कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा, जबकि ऑफलाइन मोड में इसके लिए 200 रुपये देने होते हैं। मोबाइल नंबर अपडेट कराने पर भी कोई चार्ज नहीं लगेगा और एनओसी लेट होने पर लगने वाला 300 से 500 रुपये प्रति महीने का जुर्माना भी समाप्त कर दिया गया है। सारथी पोर्टल पर डीएल नंबर डालते ही नाम और पता अपने आप सिस्टम से जुड़ जाएगा। इसके अलावा, पता बदलने के आवेदन पर आरटीओ को 15 दिनों में फैसला लेना होगा और यदि 30 दिनों तक कोई जवाब नहीं मिलता है, तो आवेदन स्वतः स्वीकृत मान लिया जाएगा।
ड्राइविंग टेस्ट और मेडिकल जांच के नियम भी पहले से ज्यादा सख्त किए जा रहे हैं। लाइसेंस के लिए दी जाने वाली फोटो में आवेदक का चेहरा कम से कम 70 फीसदी स्पष्ट दिखना अनिवार्य होगा। ड्राइविंग टेस्ट की अवधि अब 7 दिन की जगह 15 दिन बाद रखी जाएगी, जिसमें पास होने के लिए न्यूनतम अंक सीमा 60 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दी गई है। इसके साथ ही मेडिकल फॉर्म 1ए में आवेदक को मिर्गी, एलर्जी, नियमित दवाओं और शरीर में लगे किसी भी तरह के मेडिकल इम्प्लांट की जानकारी दर्ज करानी होगी, ताकि दुर्घटना की स्थिति में डॉक्टरों को चालक की मेडिकल हिस्ट्री तुरंत मिल सके और सही इलाज शुरू किया जा सके।


