रायपुर:
यात्रियों की सुरक्षा में लापरवाही और परिवहन नियमों की लगातार अनदेखी करने वाले बस ऑपरेटरों पर छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। पैनिक बटन और व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (VLTD/GPS) नहीं लगाने के आरोप में प्रदेश भर की 170 बसों के परमिट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए गए हैं। इसके साथ ही इन सभी बसों को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया है। इस आदेश के बाद अब ये बसें न तो प्रदेश में और न ही देश की किसी अन्य सड़क पर चल सकेंगी।
अपर परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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अगर सड़क पर उतरीं बसें, तो होगी जब्ती और जेल
परिवहन विभाग ने सख्त चेतावनी दी है कि जिन 170 बसों का परमिट रद्द किया गया है, उनके संचालन पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। यदि इसके बावजूद कोई भी बस सड़क पर दौड़ती पाई गई, तो:
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वाहन को मौके पर ही जब्त किया जाएगा।
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बस मालिक पर ₹10,000 का जुर्माना लगाया जाएगा।
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मोटर व्हीकल एक्ट के तहत बस मालिक को 6 महीने तक की जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।
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3 महीने का चला मेगा अभियान: 412 बसों में GPS मिला ही नहीं
शासन के निर्देश पर परिवहन विभाग ने जुलाई से सितंबर तक प्रदेशव्यापी जांच अभियान चलाया था। उड़नदस्ता टीमों और आरटीओ अधिकारियों ने रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, रायगढ़, जगदलपुर और अंबिकापुर नेशनल हाईवे पर बसों की सघन चेकिंग की। जांच में चौकाने वाले खुलासे हुए:
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412 बसों में जीपीएस लगा ही नहीं पाया गया।
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210 बसों में जीपीएस लगा तो था, लेकिन जानबूझकर बंद रखा गया था।
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85 बसों में पैनिक बटन मौजूद था, लेकिन वह तकनीकी रूप से काम नहीं कर रहा था।
जांच के पहले चरण में 300 बसों को 15 दिन की अंतिम मोहलत देते हुए नोटिस जारी किया गया था। इनमें से 140 बस संचालकों ने तुरंत डिवाइस लगवाकर पोर्टल पर एंट्री करा ली, लेकिन 170 ऑपरेटरों ने नोटिस की अनदेखी की, जिसके बाद उनके परमिट निरस्त करने का अंतिम कदम उठाया गया।
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क्यों जरूरी है VLTD और पैनिक बटन?
अधिकारियों के अनुसार, वीएलटीडी सिर्फ एक गैजेट नहीं, बल्कि सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी है:
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लाइव लोकेशन और रूट मॉनिटरिंग: वीएलटीडी से कंट्रोल रूम को यह पता चलता रहता है कि बस तय रूट और टाइमिंग पर चल रही है या नहीं। कई ऑपरेटर अवैध फेरे लगाने के लिए इसे बंद कर देते थे।
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हादसों में त्वरित मदद: पिछले साल कवर्धा बस हादसे के दौरान जीपीएस न होने के कारण 3 घंटे तक दुर्घटनाग्रस्त बस की लोकेशन ट्रेस नहीं हो पाई थी। वीएलटीडी होने पर 5 मिनट में सटीक लोकेशन मिल जाती है।
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महिला सुरक्षा: किसी भी आपात स्थिति या छेड़छाड़ की घटना पर पैनिक बटन दबाते ही डायल 112 पर अलर्ट चला जाता है। इसके साथ ही नजदीकी थाने और आरटीओ कंट्रोल रूम को बस की लाइव लोकेशन तुरंत मिल जाती है।
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आंकड़ों में प्रदेश का बस नेटवर्क
| श्रेणी | कुल संख्या |
| प्रदेश में कुल पंजीकृत बसें | 12,000 |
| यात्री बसें (पब्लिक ट्रांसपोर्ट) | 4,500 |
| स्कूल बसें | 6,500 |
| ऑल इंडिया टूरिस्ट व प्राइवेट बसें | 1,000 |
“बस मालिकों समेत सभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालकों को परिवहन विभाग के नियमों का शत-प्रतिशत पालन करना होगा। सुरक्षा को ताक पर रखकर गाड़ियां चलाने वालों के खिलाफ कोई नरमी नहीं बरती जाएगी। जिन 170 बस मालिकों का परमिट निरस्त किया गया है, उन्होंने परमिट शर्तों का खुला उल्लंघन किया था।”— डी. रवि शंकर, अपर परिवहन आयुक्त


