रायपुर:
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर धान उपार्जन की प्रक्रिया को पारदर्शी, डिजिटल और बिचौलियों व फर्जीवाड़े से मुक्त बनाने के लिए शासन ने नियमों में व्यापक कड़ाई कर दी है। नई व्यवस्था के तहत किसानों को अपने टोकन में दर्ज मात्रा के मुताबिक ही धान लेकर उपार्जन केंद्र पहुंचना होगा। यदि कोई किसान निर्धारित मात्रा से कम धान लेकर आता है, तो शेष बची हुई मात्रा का रकबा स्वतः लैप्स मान लिया जाएगा और उस रकबे के लिए दोबारा टोकन जारी नहीं किया जाएगा।
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बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही होगी तौल
धान खरीदी केंद्रों पर किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए इस बार बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। किसान की वास्तविक पहचान फिंगरप्रिंट या आइरिस (आंखों की पुतली) स्कैन के जरिए सत्यापित होने के बाद ही धान की तौल की जाएगी। इसके अलावा, खरीदी का पूरा रिकॉर्ड रियल-टाइम डेटाबेस में दर्ज होगा, जिससे ऑफलाइन या बैक-डेटेड प्रविष्टियों की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
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टोकन आवंटन का नया गणित और रकबा लैप्स होने का नियम
शासन द्वारा तय नई व्यवस्था के अनुसार टोकन सीमा तय की गई है:
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2 एकड़ तक के किसान: अधिकतम 1 टोकन
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10 एकड़ तक के किसान: अधिकतम 2 टोकन (धान की मात्रा 50-50% के अनुपात में विभाजित)
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10 एकड़ से अधिक रकबा: अधिकतम 3 टोकन (33-33-34% के अनुपात में विभाजित)
समझें नियम: यदि किसी किसान ने 4 एकड़ भूमि के लिए (प्रति एकड़ 21 क्विंटल के मान से) 84 क्विंटल का टोकन लिया, लेकिन वह केंद्र पर सिर्फ 63 क्विंटल धान लेकर पहुंचा, तो शेष 21 क्विंटल के बराबर 1 एकड़ का रकबा स्वतः निरस्त (लैप्स) हो जाएगा।
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70% टोकन मोबाइल ऐप और 30% समितियों से मिलेंगे
किसानों की सहूलियत और कतारों से बचाव के लिए कुल टोकनों का 70 प्रतिशत हिस्सा मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन जारी किया जाएगा, जबकि 30 प्रतिशत टोकन उपार्जन समितियों के जरिए ऑफलाइन वितरित होंगे।
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यदि किसान तय तिथि पर धान लेकर केंद्र नहीं पहुंच पाता है, तो अगले दिन उसका टोकन स्वतः निरस्त हो जाएगा।
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ऐसी स्थिति में दोबारा टोकन कटवाने का अवसर केवल एक बार मिलेगा। यदि दूसरी बार भी टोकन डिलीट हुआ, तो वह रकबा पूरी तरह लैप्स हो जाएगा।
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समर्थन मूल्य: कॉमन धान ₹2441 और ग्रेड-ए ₹2461 प्रति क्विंटल
इस सत्र में समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी निम्नलिखित दरों पर की जाएगी:
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कॉमन ग्रेड धान: ₹2,441 प्रति क्विंटल
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ग्रेड-ए धान: ₹2,461 प्रति क्विंटल
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एग्रीस्टैक से रुकेगी रिसाइक्लिंग और दोहराव
धान की रिसाइक्लिंग (बिचौलियों द्वारा बार-बार उसी धान को बेचना) रोकने के लिए जमीन के रकबे को डिजिटल ‘एग्रीस्टैक’ प्रणाली से लिंक किया जा रहा है। सॉफ्टवेयर में किसान के हर गांव और खसरे का पूरा ब्योरा दर्ज रहेगा। जैसे ही किसी खसरे के रकबे पर टोकन कटेगा, सिस्टम में उस पर डिजिटल टिक मार्क लग जाएगा, जिससे उसी खसरे पर दोबारा टोकन कटना नामुमकिन होगा। इस पूरी प्रक्रिया की केंद्रीयकृत मॉनिटरिंग सीधे राजधानी रायपुर से की जाएगी।


