नई दिल्ली:
केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन, भत्तों और पेंशन संशोधन के लिए गठित 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th CPC) ने अपनी 18 महीने की समयसीमा का लगभग 66 प्रतिशत हिस्सा पूरा कर लिया है। आयोग ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया माध्यम से संकेत दिया है कि कर्मचारी और पेंशनभोगी जल्द ही संशोधित वेतन संरचना (रिवाइज्ड पे स्ट्रक्चर) और नए फिटमेंट फैक्टर से जुड़ी बहुप्रतीक्षित सिफारिशों की उम्मीद कर सकते हैं। आयोग के इस फैसले से रक्षा और रेलवे कर्मियों सहित केंद्र सरकार के लगभग 50 लाख कर्मचारियों और 65 लाख से अधिक पेंशनभोगियों, यानी कुल 1.15 करोड़ से ज्यादा परिवारों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में गठित इस उच्चस्तरीय आयोग में पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन सदस्य-सचिव और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य व वित्त विशेषज्ञ प्रोफेसर पुलक घोष सदस्य के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। आयोग को अपने गठन की तारीख से 18 महीने के भीतर केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है। केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा मंजूर किए गए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ (ToR) के तहत आयोग उन व्यावहारिक और जरूरी बदलावों का आकलन कर रहा है, जिन्हें वित्तीय संतुलन बनाए रखते हुए लागू किया जा सके।
प्रक्रिया की प्रगति पर नजर डालें तो आयोग की आधिकारिक बैठकों का दौर मार्च से ही शुरू हो गया था, जबकि विभिन्न कर्मचारी यूनियनों, श्रमिक संगठनों, मंत्रालयों और पेंशनर एसोसिएशनों से सुझाव व आंकड़े जुटाने की तय मियाद जुलाई में पूरी हो चुकी है। अब आयोग प्राप्त ज्ञापनों और सुझावों का गहन विश्लेषण कर रहा है। इसके आधार पर पे-मैट्रिक्स, महंगाई भत्ता (DA), महंगाई राहत (DR), मकान किराया भत्ता (HRA) और पदोन्नति व इंक्रीमेंट से जुड़े वित्तीय लाभों के नए फॉर्मूले को अंतिम रूप दिया जा रहा है। रक्षा और रेलवे जैसे संवेदनशील विभागों की विशेष कामकाजी जरूरतों और मांगों को भी इस ड्राफ्ट में प्रमुखता से शामिल किया जा रहा है।
नियमों के मुताबिक, आयोग के पास अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने के लिए मई 2027 तक का समय है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद विभिन्न मंत्रालयों की समीक्षा, कैबिनेट की मंजूरी और प्रशासनिक क्रियान्वयन की प्रक्रिया में दो से तीन साल का अतिरिक्त समय लग सकता है। इसका मतलब यह है कि मई 2027 में आने वाली सिफारिशों का पूर्ण जमीनी क्रियान्वयन 2029 या 2030 तक खिंच सकता है। इसके बावजूद, कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान की चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि नए वेतनमान को पिछली तारीख से लागू कर बीच की अवधि का पूरा बकाया (एरियर) एकमुश्त प्रदान किए जाने की मजबूत संभावना है।
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