नई दिल्ली:
भारतीय सशस्त्र बलों में अपनी सेवाएं दे रहे हजारों अग्निवीरों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने एक अहम घोषणा करते हुए बताया कि अग्निवीरों के सेवा कार्यकाल को 2 वर्ष के लिए बढ़ाया जा रहा है। यानी जो अग्निवीर 4 साल का कार्यकाल पूरा कर सेवानिवृत्त होने वाले थे, वे अब कुल 6 वर्षों तक देश की सेवा कर सकेंगे। केंद्रीय कैबिनेट ने अग्निपथ योजना में किए गए इस बड़े बदलाव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले से न केवल युवाओं को सेना में लंबे समय तक सेवा देने का अवसर मिलेगा, बल्कि भविष्य में उनके नियमित (परमानेंट) होने के नए रास्ते भी खुलेंगे।
योजना के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार, 4 वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के बाद केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को मेरिट के आधार पर स्थायी काडर में शामिल किया जाना था, जबकि शेष 75 प्रतिशत जवानों को कार्यमुक्त किया जाना तय था। नए फैसले के तहत अब कार्यमुक्त होने वाले इन 75 प्रतिशत युवाओं को 2 साल की अतिरिक्त सेवा का विकल्प दिया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस 2 वर्ष की विस्तारित अवधि के बाद भी यदि जवान सेना में बने रहने के इच्छुक होते हैं और निर्धारित मानकों पर खरे उतरते हैं, तो उन्हें भी सशस्त्र बलों में स्थायी रूप से शामिल किया जा सकेगा।
सीडीएस ने स्पष्ट किया कि विस्तारित 2 वर्षों के दौरान अग्निवीरों को आर्थिक स्तर पर भी सीधा लाभ मिलेगा। इस अवधि में उन्हें बढ़ा हुआ वेतन दिया जाएगा और 6 वर्ष की पूर्ण सेवा के बाद जब वे बाहर निकलेंगे, तो उनके ‘विस्तारित सेवा निधि’ पैकेज की राशि भी पहले की तुलना में कहीं अधिक होगी। उन्होंने बताया कि 14 जून 2022 को लागू हुई इस योजना की लगातार उच्च स्तर पर समीक्षा की जा रही थी। पिछले लगभग पौने चार वर्षों में अग्निवीरों का अनुशासन, कार्यकुशलता और शारीरिक फिटनेस उच्च कोटि की रही है। 10वीं पास जवानों को सेवा के दौरान आगे की पढ़ाई का अवसर भी दिया गया है। इस सकारात्मक फीडबैक को ध्यान में रखते हुए ही सरकार ने यह कदम उठाया है।
सरकार का यह निर्णय अत्यंत रणनीतिक समय पर आया है, क्योंकि नवंबर और दिसंबर 2026 में पहले बैच के लगभग 75 प्रतिशत अग्निवीर कार्यमुक्त होने की कगार पर थे। आंकड़ों के मुताबिक, पहले बैच में कुल 24,400 अग्निवीर भर्ती हुए थे, जिनमें से लगभग 18,300 जवानों का 4 वर्षीय कार्यकाल इस साल के अंत में समाप्त हो रहा था। हाल ही में भारतीय वायुसेना ने भी अपने पहले ‘अग्निवीर वायु’ बैच के 2,850 जवानों में से 25 फीसदी यानी 712 जवानों को नियमित सेवा में शामिल करने का फैसला किया था। अब नए नियमों के प्रभावी होने से पहले बैच के हजारों जवानों को तुरंत सेवा विस्तार का लाभ मिल सकेगा।


